रिटेल महंगाई कम होने का मतलब आपकी जेब के लिए क्या है?

  • खाने-पीने की चीजों की कीमतों में गिरावट ने दिलाई राहत
  • जुलाई 2019 के बाद पहली बार इतनी कम हुई महंगाई
  • गांवों में महंगाई दर 3% से भी नीचे, शहरी क्षेत्रों में मामूली गिरावट

नई दिल्ली। देश में आम जनता के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.16% पर आ गई है, जो पिछले 69 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले जुलाई 2019 में रिटेल महंगाई 3.15% रही थी। मंगलवार, 13 मई को सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार गिरावट के चलते महंगाई में यह बड़ी कमी दर्ज की गई है।

मार्च 2025 में खुदरा महंगाई दर 3.34% थी, जो उस समय 67 महीनों का न्यूनतम स्तर था।

खाद्य महंगाई दर में आई गिरावट

महंगाई दर में गिरावट का बड़ा कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी है। महंगाई के बास्केट में खाद्य वस्तुओं का योगदान लगभग 50% होता है। अप्रैल में खाद्य महंगाई दर 2.69% से घटकर 1.78% पर आ गई, जो आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी राहत

ग्रामीण भारत में महंगाई दर मार्च के 3.25% से गिरकर अप्रैल में 2.92% हो गई है। वहीं, शहरी क्षेत्रों की बात करें तो यहां महंगाई 3.43% से घटकर 3.36% पर दर्ज की गई।

CPI से तय होती है महंगाई

रिटेल महंगाई दर की गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर की जाती है। यह सूचकांक उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं की औसत कीमत में बदलाव को मापता है। महंगाई तय करने में कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतें, मैन्युफैक्चर्ड कॉस्ट समेत लगभग 300 वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों की अहम भूमिका होती है।

कैसे घटती-बढ़ती है महंगाई

महंगाई दर का सीधा संबंध बाजार में मांग और आपूर्ति से होता है। जब लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है और चीजों की मांग बढ़ती है, लेकिन आपूर्ति कम रहती है, तो कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके उलट, यदि मांग कम हो और आपूर्ति ज्यादा, तो महंगाई घटती है।

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