- इस्तांबुल वार्ता, क्या होगी रूस-यूक्रेन शांति की शुरुआत?
- पुतिन का वार्ता से इंकार, पीछे क्या कारण हैं?
- जेलेंस्की की कड़ी प्रतिक्रिया और यूक्रेन का रुख
अंकारा । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए तुर्किये की मध्यस्थता में शांति वार्ता शुरू हो गई है। इस्तांबुल में हो रही इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं, लेकिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वार्ता में भाग नहीं लेने का फैसला किया है।
कौन शामिल है वार्ता में?
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यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव कर रहे हैं।
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रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पुतिन के सहयोगी व्लादिमिर मेंडिस्की के हाथों में है।
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तुर्किये के अधिकारी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
तीन साल बाद सीधी बातचीत
फरवरी 2022 से जारी इस युद्ध के बीच यह पहली बार है जब दोनों देश शांति के लिए सीधी बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, पहले यह उम्मीद थी कि राष्ट्रपति पुतिन और वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की वार्ता में शामिल होंगे, लेकिन क्रेमलिन ने स्पष्ट कर दिया कि पुतिन इस बैठक में नहीं आएंगे।
ज़ेलेंस्की का रुख: “जमीन नहीं देंगे”
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने साफ किया है कि वे रूस के कब्जे वाले इलाकों (क्रीमिया सहित) को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमारी ज़मीन यूक्रेन की ही रहेगी।” रूस लगातार मांग करता रहा है कि यूक्रेन चार और क्षेत्रों के साथ क्रीमिया को रूस का हिस्सा माने।
ट्रम्प का बयान: “पुतिन के बिना समाधान मुश्किल”
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, “जब तक पुतिन और मैं साथ नहीं बैठते, तब तक समाधान नहीं निकलेगा।” हालांकि, क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन की ट्रम्प से मिलने की कोई योजना नहीं है।
प्रतिबंधों की चेतावनी
ज़ेलेंस्की ने चेतावनी दी कि अगर रूस युद्ध बंद नहीं करता, तो पश्चिमी देश उस पर और सख्त प्रतिबंध लगाएंगे। अमेरिका और यूरोप ने 30 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है, लेकिन रूस ने अभी तक सहमति नहीं दी है।
आगे क्या?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस वार्ता से कोई ठोस समझौता होगा या नहीं, लेकिन यह युद्ध विराम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यूक्रेन का कहना है कि वह शांति चाहता है, लेकिन “अपनी ज़मीन की कीमत पर नहीं।”








