- मार्च में 3% थी IIP वृद्धि, अप्रैल में घटकर 1.2% होने का अनुमान
- खनन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती प्रमुख कारण
- टैरिफ नीति से निर्यात पर पड़ा असर, IIP पर दबाव
नई दिल्ली। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) की एक ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अप्रैल 2025 में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर (IIP) घटकर सिर्फ 1.2% रह सकती है, जो मार्च में दर्ज 3% से काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से खनन और विनिर्माण गतिविधियों में आई सुस्ती तथा वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के कारण हुई है।
निर्यात और टैरिफ का असर
रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका की टैरिफ नीति के बाद निर्यात पर दबाव बढ़ा है। चूंकि IIP में निर्यात का 30-35% तक योगदान होता है, इसलिए जब तक वैश्विक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक IIP दबाव में रह सकता है।
कोर सेक्टर और निर्माण गतिविधियों में गिरावट
अप्रैल में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 0.5% रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.9% के मुकाबले बेहद कम है। सीमेंट (-16.7%) और स्टील (-10%) उत्पादन में मासिक आधार पर भारी गिरावट से निर्माण क्षेत्र की स्थिति कमजोर हुई है।
व्यापार घाटा और मांग में कमी
अप्रैल 2025 में देश का व्यापार घाटा 26.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष अप्रैल की तुलना में 7.2 अरब डॉलर अधिक है। वहीं ई-वे बिल और टोल कलेक्शन में तेजी देखी गई है, परंतु ऑटो और पेट्रोलियम की मांग में गिरावट बनी हुई है।
ग्रामीण मांग कमजोर, शहरी मांग पर निर्भरता बढ़ी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अप्रैल में उपभोक्ता मांग कमजोर रही, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। पूंजीगत वस्तुओं में हालांकि हल्का सुधार देखा जा सकता है। औद्योगिक उत्पादन के आधिकारिक आंकड़े 28 मई को जारी किए जाएंगे।








