भीषण गर्मी में पांच लाख से ज्यादा लोग तरसे एक बूंद पानी को

  • लखनऊ में भीषण गर्मी के बीच पांच लाख लोगों को पानी नहीं
  • ट्यूबवेल खराब, लो प्रेशर, सीवर का पानी बड़ी समस्या
  • पार्षदों तक को प्रदर्शन करना पड़ा, फिर भी समाधान नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है। शहर की कुल आबादी का 20% हिस्सा, यानी करीब पांच लाख लोग, साफ पानी के लिए जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई वार्डों में गंदा, बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे डायरिया और अन्य संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं।

नगर निगम की सुनवाई में रो पड़े लोग, पार्षद धरने पर

निवादगंज निवासी संजय मिश्रा ने बताया कि पिछले 9 महीने से घर में ठीक से पानी नहीं आ रहा। आधे घंटे से कम समय तक ही सप्लाई होती है। शिकायतों का कोई असर नहीं है।
पार्षद मनीष कौशिक भी मजबूरी में धरने पर बैठ चुके हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में दो से तीन नए ट्यूबवेल की सख्त जरूरत है।

हर वार्ड में समस्या, जलकल का दावा- “सब ठीक है”

  • लो प्रेशर,

  • सीवर का पानी पाइप में मिलना,

  • कम समय तक जलापूर्ति,

  • खराब ट्यूबवेल,

…जैसी समस्याएं लगभग हर वार्ड में हैं। इसके बावजूद जलकल विभाग का दावा है कि शहर में 750 ट्यूबवेल हैं, जिनमें से 90% से अधिक काम कर रहे हैं।

“VVIP इलाका, फिर भी सीवर का पानी पीने को मजबूर”

महात्मा गांधी वार्ड के पार्षद अमित चौधरी ने बताया कि क्षेत्र का आधा हिस्सा VVIP इलाका है, लेकिन दूसरे हिस्से में सीवर का रिसाव वाला पानी सप्लाई हो रहा है। कई इलाकों जैसे सईदनगर, बर्फखाना, उदयगंज और मार्टिनपुरवा में लोग संक्रमण से पीड़ित हैं।

उन्होंने कहा,

“70 साल पुरानी पाइप लाइनें जर्जर हो चुकी हैं। नगर आयुक्तों को बार-बार बताया गया है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। लोग बीमार हो रहे हैं और अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।”

पानी में बालू, ट्यूबवेल खराब, लेकिन जिम्मेदार बेफिक्र

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि उनके इलाके में बालू मिला पानी आ रहा है। ट्यूबवेल बार-बार खराब हो रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही
टेढ़ी खजूर के राजेश रावत ने आरोप लगाया कि जलकल विभाग लापरवाही बरत रहा है, जबकि पार्षद खुद समाधान कराने की कोशिश कर रहे हैं।

लाखों की योजनाएं, फिर भी हाल बेहाल

सरकार द्वारा करोड़ों रुपए के पैकेज दिए जाने के बावजूद, लखनऊ के पुराने इलाकों और हाल ही में नगर निगम में जुड़े क्षेत्रों में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। वाटर लेवल घट रहा है, और वाटर हार्वेस्टिंग की जरूरत पर लगातार आवाज उठ रही है।

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