
- आगरा में विदेशी असलहों के लाइसेंसों की जांच शुरू
- भाजपा नेता की अमेरिकन पिस्टल पाई गई संदिग्ध
- एसटीएफ ने 7 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया केस
आगरा। शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े और विदेशी असलहों की अवैध खरीद-फरोख्त के खुलासे के बाद अब प्रशासन एक्शन में आ गया है। आगरा कलेक्ट्रेट में विदेशी पिस्टलों के लाइसेंस की गहन जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने बीते 10 और 20 वर्षों में जारी सभी लाइसेंसों की पत्रावलियां खंगालने का निर्देश दिया है।
भाजपा नेता की अमेरिकन पिस्टल पड़ी संदिग्ध, जांच की रफ्तार तेज
जांच की शुरुआत उस समय हुई जब प्रशासनिक रिकार्ड में दर्ज भाजपा नेता की 18 साल पुरानी अमेरिकन पिस्टल संदिग्ध पाई गई। इस आधार पर पहले 10 साल और फिर 20 साल के भीतर जारी हुए विदेशी असलहों के लाइसेंस का सत्यापन शुरू किया गया है।
24 मई को नाई की मंडी थाने में दर्ज हुआ था केस
फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध विदेशी असलहों के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 24 मई को थाना नाई की मंडी में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस केस में प्रॉपर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, उसके पिता शिवकुमार सारस्वत, मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी, राजेश बघेल, मोहम्मद जैद, अरशद और रिटायर्ड असलहा लिपिक संजय कपूर को आरोपी बनाया गया है।
52 हजार लाइसेंस की हो रही स्कैनिंग, यूनिक आईडी से होगा मिलान
जिले में इस समय करीब 52,000 शस्त्र लाइसेंस पंजीकृत हैं। एसटीएफ द्वारा मामले के खुलासे के बाद इन सभी लाइसेंसों का यूनिक आईडी से मिलान कराया जा रहा है। साथ ही कलेक्ट्रेट कार्यालय से 10 साल में जारी और निरस्त किए गए लाइसेंसों की फाइलें अलग की जा रही हैं।
स्पोर्ट्स कोटा में मिले लाइसेंस भी जांच के घेरे में
शस्त्र फर्जीवाड़े में स्पोर्ट्स कोटा के नाम पर लिए गए लाइसेंस भी अब प्रशासन की रडार पर हैं। ऐसे लाइसेंसों पर दर्ज हथियारों की वैधता की जांच शुरू हो चुकी है। एसटीएफ ने इस मामले में रिटायर्ड असलहा लिपिक संजय कपूर की संलिप्तता पाई है।
भाजपा नेता ने भी दर्ज कराया मामला
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब एक भाजपा नेता ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए संदिग्ध पिस्टल बेचने के मामले में केस दर्ज कराया। इस पिस्टल की सत्यता को लेकर संदेह जताया गया है, जिससे विदेशी हथियारों के लाइसेंस की पूरी श्रृंखला जांच के दायरे में आ गई है।








