आगरा। शनिवार को आगरा के जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लायल अस्पताल) में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता चौहान ने अचानक पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं को देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और सीएमएस समेत पूरे अस्पताल प्रशासन को जमकर फटकार लगाई।
निरीक्षण में मिली अव्यवस्था
डॉ. चौहान ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल की हालत पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं, वार्ड में पीने का पानी नहीं है, टॉयलेट टूटे पड़े हैं और भीषण गर्मी में न एसी की व्यवस्था है न कूलर की। अस्पताल के बड़े-बड़े हॉल गर्म तंदूर जैसे हो गए हैं।
मरीजों ने बताया: “आपके आने से पहले लगाए कूलर”
महिला आयोग की अध्यक्ष ने जब वार्ड में जाकर मरीजों से बात की तो उन्होंने बताया कि “आपके आने से ठीक पहले ही यहां कूलर लगाए गए हैं। पहले सिर्फ दो कूलर थे, अब तीन-चार और रख दिए हैं।” इस पर डॉ. चौहान ने नाराज होकर पूछा, “मेरे आने पर ही कूलर क्यों लगाए गए? कॉरिडोर में एक भी पंखा नहीं है, तीमारदार कैसे बैठेंगे?”
डिलीवरी के बाद मांगे जाते हैं पैसे
निरीक्षण के दौरान कई महिलाओं ने शिकायत की कि अस्पताल में डिलीवरी के बाद उनसे पैसे मांगे जाते हैं। एक महिला ने कहा कि पट्टी करने के लिए भी पैसे मांगे गए। इस पर डॉ. चौहान भड़क गईं और सीएमएस डॉ. रचना गुप्ता से पूछा, “स्टाफ पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?”
गंदगी और टूटा टॉयलेट देख बिफरीं अध्यक्ष
अस्पताल के टॉयलेट की हालत देख डॉ. चौहान हैरान रह गईं। कई टॉयलेट गंदे थे, कुछ के दरवाजे टूटे हुए थे और एक को कपड़े की रस्सी से बांधकर बंद किया गया था। सफाईकर्मी को तुरंत सफाई करते देख उन्होंने कहा, “नौकरी चली जाएगी। सुधार क्यों नहीं करते समय पर?”
लिफ्ट बंद, PWD की पोल खुली
निरीक्षण के दौरान लिफ्ट बंद पाई गई। डॉ. चौहान ने सवाल उठाया कि “दो महीने पहले भी लिफ्ट बंद थी, अब भी बंद है, इसे ठीक क्यों नहीं कराया?” सीएमएस ने जवाब दिया कि पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा है। लेकिन जब डॉ. चौहान ने खुद पीडब्ल्यूडी अधिकारी से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि ऐसा कोई पत्र ही नहीं आया। इस पर डॉ. चौहान ने तत्काल लिफ्ट ठीक कराने के निर्देश दिए।
11 बजे तक नहीं पहुंचे डॉक्टर
निरीक्षण के समय सुबह 11 बजे तक कई डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे थे। इस पर महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा, “सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दो महीने पहले भी निरीक्षण किया था, तब वॉर्निंग दी थी। लेकिन अब कार्यवाही तय है।”








