
कानपुर। IIT कानपुर देश की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा चुका है। यहां के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग ने भारतीय सेना के लिए कई अत्याधुनिक ड्रोन विकसित किए हैं, जो न केवल सामान ढोने में कारगर हैं, बल्कि आत्मघाती (सुसाइड) मिशन में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल एक खास किस्म का ‘विबर्म’ सर्विलांस ड्रोन पायलट प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसे सेना से शुरुआती ऑर्डर भी मिले हैं।
50 किलोमीटर तक करेगा दुश्मन पर नजर
एयरोस्पेस विभाग के प्रोफेसर अभिषेक ने बताया कि इस विशेष ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी तक निगरानी करने की क्षमता है। यह दुश्मन के ठिकानों पर लगभग 50 किलोमीटर तक सर्विलांस कर सकता है। इसकी फ्लाइट स्टेबिलिटी और उड़ान अवधि इसे अन्य ड्रोन से ज्यादा प्रभावशाली बनाती है।
25 लाख का हाई-विजिबिलिटी कैमरा लगाया गया
ड्रोन में एक उच्च गुणवत्ता वाला कैमरा लगाया गया है जिसकी कीमत करीब 25 लाख रुपए है। प्रो. अभिषेक के मुताबिक, “ड्रोन में जितनी ज्यादा फैसिलिटी और तकनीक जोड़ी जाएगी, उसकी कीमत उतनी ही बढ़ेगी। अभी इस ड्रोन की अनुमानित लागत लगभग 1 करोड़ रुपए तक है।”
टीथर ड्रोन भी लगभग तैयार
IIT कानपुर की टीम एक और खास ड्रोन पर काम कर रही है, जिसे टीथर ड्रोन कहा जाता है। यह पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक और बैटरी आधारित होगा। प्रो. अभिषेक ने बताया कि यह ड्रोन 100 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और लगातार 8 घंटे तक उड़ सकता है। इसकी कीमत इसके साइज और उपयोग के अनुसार 2 करोड़ से लेकर 5 करोड़ रुपए तक हो सकती है।
तकनीकी अनुसंधान से रक्षा में आत्मनिर्भरता
IIT कानपुर के ये इनोवेटिव प्रयास रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देते हैं। सुसाइड ड्रोन, मालवाहक ड्रोन और अब विबर्म व टीथर ड्रोन जैसी उन्नत तकनीकों से भारतीय सेना की निगरानी और रणनीति क्षमताएं और अधिक सशक्त होंगी।









