
- ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ सकता है नकारात्मक असर
- 230 विद्यालयों में 20 से भी कम छात्र, मर्ज कर भवनों का होगा अन्य उपयोग
- विनय सिंह और कुलदीप वर्मा के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन, मर्जर नीति वापस लेने की मांग
अंबेडकरनगर। परिषदीय विद्यालयों के पेयरिंग और मर्जर की शासन नीति के खिलाफ शुक्रवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने इसे शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 और बाल अधिकारों के विपरीत बताया है।
संघ के जिलाध्यक्ष विनय सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कम छात्र संख्या के आधार पर एक किलोमीटर के दायरे में स्थित विद्यालयों को समायोजित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों, विशेषकर छात्राओं पर पड़ेगा। उनका कहना है कि नीति व्यवहारिक धरातल पर खरी नहीं उतरती और इससे बुनियादी शिक्षा प्रणाली पर प्रतिकूल असर होगा।
अधिनियम के प्रावधानों का किया हवाला
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार 300 की जनसंख्या और एक किलोमीटर की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय तथा तीन किलोमीटर की दूरी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय होना आवश्यक है। इसी आधार पर वर्षों पहले स्कूलों की स्थापना की गई थी। वर्तमान नीति इस प्रावधान के विपरीत जाकर काम कर रही है।
विनय सिंह ने बताया कि कई विद्यालयों में छात्र संख्या घटने के पीछे कई प्रशासनिक कारण रहे हैं, जैसे— निजी विद्यालयों को बगैर पर्याप्त जांच के मान्यता देना, मानक विहीन विद्यालयों का संचालन, शिक्षक पदस्थापन में असंतुलन और वर्षों तक रिक्त पदों पर नियुक्ति न होना। इसके लिए शिक्षकों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।








