- पूजन व्यवस्था वैदिक परंपरा अनुसार, पंडित उत्कर्ष तिवारी के देखरेख में
- शिवरात्रि और सावन में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु
- धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है यह प्राचीन स्थल
अम्बेडकरनगर। अकबरपुर तहसील की बेवाना ग्राम पंचायत के मुसइतपुर मजरे में स्थित स्वयंभू झारखंडेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था का पुराना केंद्र रहा है। यह स्थल क्षेत्रीय और बाहरी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, यहां की पूजा-पद्धति सदियों से चली आ रही है। वर्तमान में मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार कार्य तेजी से चल रहा है।
सदियों पुराना है मंदिर का इतिहास
ग्रामीणों के अनुसार स्वयंभू झारखंडेश्वर महादेव की स्थापना कई सौ वर्ष पूर्व मानी जाती है। यहां के वरिष्ठ नागरिक बताते हैं कि जब कभी क्षेत्र में बारिश नहीं होती थी और सूखे की स्थिति बनती थी, तो गांववाले एकत्र होकर कई कुओं से जल इकट्ठा करते थे और शिवलिंग का जलाभिषेक करते थे। इसके बाद प्रायः 24 घंटे के भीतर बारिश होती थी। यह परंपरा अब भी श्रद्धा से जुड़ी हुई है।
ध्वस्त हुआ था प्राचीन मंदिर, सुरक्षित रहा शिवलिंग
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहले इस स्थान पर एक भव्य मंदिर हुआ करता था, जिसे किसी आक्रांता ने ध्वस्त कर दिया था। हालांकि, आक्रांता शिवलिंग को क्षति नहीं पहुँचा सका। वर्षों तक यह शिवलिंग खुले में ही पूजित होता रहा। कालांतर में सरयू नदी के पार दक्षिण दिशा से आए ब्राह्मणों ने मुसइतपुर में निवास आरंभ किया और इस पवित्र स्थल पर नियमित पूजा की परंपरा फिर से आरंभ हुई।
कायाकल्प के बाद नये स्वरूप में मंदिर
वर्तमान में मंदिर का पूर्ण रूप से कायाकल्प किया जा चुका है। चारदीवारी, गर्भगृह और कलश सहित नवनिर्मित मंदिर में अब प्रतिदिन विधिवत पूजन होता है। शिवलिंग का नियमित श्रृंगार किया जाता है।








