- बिना स्वीकृति और रिकॉर्ड के हो रहे निर्माण कार्यों से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
- मछलीगांव में पहले से बनी एप्रोच रोड के लिए बाद में जारी किया गया टेंडर
- मूसेपुर कला में बिना योजना और बजट के 237 मीटर खड़ंजा बिछाया गया
अम्बेडकरनगर। जिले में इन दिनों विकास कार्यों का ऐसा स्वरूप सामने आ रहा है जो प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। गांवों में बिना किसी स्वीकृत योजना के सड़कें बन रही हैं, खड़ंजे बिछ रहे हैं और एप्रोच रोड तैयार हो रहे हैं। लेकिन इन कार्यों का कोई दस्तावेज़ी अस्तित्व नहीं है। न फाइल में नाम, न बजट का प्रावधान और न ही संबंधित विभागों के पास कोई रिकॉर्ड।
तीन ऐसे मामले सामने आए हैं जहां निर्माण कार्य ज़मीन पर पूरा हो चुका है, मगर कागज़ों में उसका कोई अता-पता नहीं। शिकायतों के बाद जांचें हुईं, गड़बड़ी की पुष्टि भी हुई, लेकिन कार्य किसने कराया, यह आज तक रहस्य बना हुआ है। अधिकांश मामलों में जांच अधिकारियों ने आंख मूंदते हुए इसे ‘श्रमदान’ घोषित कर दिया।
मामला एक: मछलीगांव की ‘पूर्व-निर्मित’ एप्रोच रोड
जलालपुर तहसील क्षेत्र के मछलीगांव में एक पुलिया के एप्रोच रोड निर्माण के लिए जिला पंचायत की ओर से 29 मई को टेंडर जारी हुआ। लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर खुलासा हुआ कि यह एप्रोच रोड पहले ही बन चुका था।
शासन की जांच टीम पहुंची। जिला पंचायत ने भी अखबारों में विज्ञप्ति प्रकाशित कर यह स्वीकार किया कि उक्त कार्य पहले से पूर्ण था। टेंडर निरस्त हुआ, मगर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि निर्माण कार्य आखिर किसने कराया। शासन से लेकर स्थानीय प्रशासन तक इस सवाल पर चुप्पी साधे है।








