देशभर में 8.5 लाख खच्चर खातों का खुलासा- सीबीआई की बड़ी कार्रवाई शुरू

  • 8.5 लाख फर्जी खाते उजागर
  • बैंक अधिकारियों की मिलीभगत
  • संदिग्ध लेनदेन पर नहीं हुई STR फाइलिंग

नई दिल्ली। सीबीआई ने देशभर में काले धन को वैध करने (मनी लॉन्ड्रिंग) की एक बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने बताया कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से करीब 8.5 लाख खच्चर खातों (म्यूल अकाउंट्स) के माध्यम से अवैध आय को सफेद किया गया। यह सारा खेल साइबर अपराध गिरोहों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से चल रहा था।

सीबीआई के अनुसार, देशभर के 743 बैंक शाखाओं में इन खातों का इस्तेमाल किया गया। दो महीने की प्राथमिक जांच के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है और अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके साथ ही 37 व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

क्या हैं खच्चर खाते (Mule Accounts)?

खच्चर खाते ऐसे बैंक अकाउंट होते हैं जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से पैसा ट्रांसफर करने और स्रोत छिपाने के लिए किया जाता है। आमतौर पर इन खातों को धोखे से खोला जाता है या फिर कुछ मामूली पैसे देकर लोगों से उनके नाम पर खुलवाए जाते हैं।

कैसे हुआ साइबर अपराध में इनका इस्तेमाल?

सीबीआई की जांच में पाया गया कि दो तरह के म्यूल खातों का इस्तेमाल हुआ:

  • साइबर म्यूल खाते: छोटे-छोटे लेन-देन वाले, जो धोखाधड़ी से कमाई जमा करने के लिए बनाए गए।

  • मनी म्यूल खाते: कुछ दिनों के अंदर कई बार बड़े ट्रांजैक्शन दिखाने वाले, जिनकी रकम आरबीआई द्वारा तय रेड फ्लैग सीमा से पार थी।

आरबीआई के नियमों के अनुसार, ऐसी गतिविधियों पर संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (STR) बनाना अनिवार्य है, लेकिन सीबीआई का दावा है कि बैंकों ने STR फाइल करने में लापरवाही बरती और यह प्रणालीगत विफलता मानी जा रही है।

सीडीडी में लापरवाही और जोखिम का गलत आकलन

एफआईआर में यह भी बताया गया कि बैंक अधिकारी ग्राहक से उचित जांच-पड़ताल (Customer Due Diligence – CDD) करने में असफल रहे, जिससे इन खातों के जरिए होने वाले वित्तीय अपराधों की आशंका का आकलन नहीं किया जा सका।

सीबीआई का आरोप है कि आरबीआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए बैंकों ने:

  • STR दाखिल नहीं की

  • उचित सावधानी नहीं बरती

  • धोखेबाजों के दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की

  • जोखिम वर्गीकरण में लापरवाही की

छद्मवेश और जालसाजी से की गई धोखाधड़ी

जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि साइबर अपराधियों ने छद्मवेश, जाली दस्तावेजों और झूठी जानकारी के जरिए लाखों खातों में पैसे डलवाकर फिर उन्हें दूसरे खातों में भेजा। यह पूरा नेटवर्क देशभर में सक्रिय था।

सीबीआई की अगली कार्रवाई

एजेंसी अब संबंधित बैंक अधिकारियों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। साथ ही ये देखा जा रहा है कि आखिर क्यों इन खातों पर समय रहते निगरानी नहीं रखी गई और RBI नियमों के उल्लंघन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

Related Posts

मार्च में धीमी पड़ सकती है भारत की अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली। Ministry of Finance India की मार्च 2026 की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार अब कुछ धीमी पड़ सकती है।…

Continue reading
अप्रैल में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक

नई दिल्ली। Reserve Bank of India (RBI) की ओर से जारी कैलेंडर के मुताबिक अप्रैल 2026 में देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 14 दिन बैंक बंद रहेंगे। इन छुट्टियों…

Continue reading