- नगर निगम के संपूर्ण समाधान दिवस में न मेयर और न नगर आयुक्त रहे मौजूद
- आशियाना की महिलाओं ने कूड़े की समस्या को लेकर हाथ जोड़े
- टैक्स और साफ-सफाई से जुड़ी कई शिकायतों पर सुनवाई नहीं
लखनऊ। नगर निगम लखनऊ द्वारा आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस शनिवार को अव्यवस्थाओं और अफसरों की गैरमौजूदगी के चलते जनता की परेशानी का समाधान करने में विफल रहा। इस आयोजन में न मेयर सुषमा खर्कवाल मौजूद रहीं और न ही नगर आयुक्त गौरव कुमार, जिसके चलते शिकायत लेकर पहुंचे दर्जनों लोग निराश होकर लौट गए।
आशियाना की महिलाओं ने कूड़े से निजात की लगाई गुहार
आशियाना सेक्टर-एच से पहुंचीं महिलाओं का सब्र उस समय टूट गया जब उन्होंने अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह के सामने हाथ जोड़कर कूड़े का ढेर हटाने की मांग की।
स्थानीय निवासी सुधा शर्मा ने बताया, “हमारा इलाका लो लैंड है, बारिश में जलभराव होता है और कूड़ा घरों तक घुस आता है। कई लोग घर के पास कूड़ा फेंकते हैं, विरोध करने पर लड़ाई करने लगते हैं।”
उन्होंने बताया कि नाबार्ड के पीछे अनधिकृत जगह पर कूड़ा डंप किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य और मानसिक तनाव का माहौल बन गया है।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी से बढ़ी अफरातफरी
मेयर सुषमा खर्कवाल इस समय गुरुग्राम में सेमिनार में भाग ले रही हैं, जबकि नगर आयुक्त गौरव कुमार पुणे में सीएम ग्रिड की बैठक में हैं। दोनों की अनुपस्थिति में समाधान दिवस में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था, जिससे अफसरों और जनता के बीच संवाद नहीं हो सका।
पुरानी शिकायतें आज भी अनसुलझी
जोन-6 से पहुंचे रूपेंद्र तिवारी ने कहा कि वे 13 साल से नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। “2018 में 39 हजार टैक्स जमा किया, लेकिन समायोजन अब तक नहीं हुआ। मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री तक शिकायत की, लेकिन गलत रिपोर्ट लगा दी गई,” उन्होंने कहा।
सफाई नहीं, समस्याएं बनी रहीं
विजय कुमार शुक्ला, निवासी लाल कुआं वार्ड, ने शिकायत की कि “एक साल से मोहल्ले में झाड़ू नहीं लगी। अधिकारी कह रहे हैं सफाई होगी, लेकिन कब – इसका कोई जवाब नहीं।”
अमीनाबाद निवासी मोहम्मद हनीफ ने बताया कि 400 स्क्वायर फीट के मकान पर अनुचित टैक्स लगा दिया गया है, कोई सुनने को तैयार नहीं।
बुजुर्गों को भी करना पड़ा इंतजार
85 वर्षीय सत्यभामा, निवासी सहादतगंज, ने कहा कि उनके छोटे से मकान पर पहले 233 रुपए हाउस टैक्स आता था, जो अब 11 हजार रुपए कर दिया गया है। उन्होंने नगर निगम से सही मूल्यांकन की गुहार लगाई।








