- स्कूलों द्वारा फीस, ड्रेस व किताबों के नाम पर की जा रही मनमानी वसूली पर रोक
- डीआईओएस ने विद्यालयों को दिए सख्त निर्देश, उल्लंघन पर हो सकती है मान्यता रद्द
- छात्रों पर खास दुकानों से खरीदारी का दबाव डालना गैरकानूनी
अंबेडकरनगर। जनपद के सभी बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में छात्रों और अभिभावकों से की जा रही मनमानी वसूली पर अब रोक लगने जा रही है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) प्रवीण तिवारी ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि स्कूलों द्वारा किताब, ड्रेस और परिवहन के नाम पर बढ़ाया गया आर्थिक बोझ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रवेश प्रक्रिया में बढ़ी मनमानी पर कड़ी नजर
नए शैक्षिक सत्र में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के प्रवेश के दौरान फीस, स्टेशनरी, यूनिफार्म और वाहन किराया बढ़ाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। डीआईओएस ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे उत्तर प्रदेश शुल्क विनियमन अधिनियम 2018, 2020 और बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन बताया है।
उन्होंने कहा कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देना विद्यालयों की कानूनी जिम्मेदारी है।
निजी दुकानों से खरीदारी का दबाव गलत
डीआईओएस को प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कई स्कूल छात्रों और अभिभावकों को स्कूल से जुड़ी किसी विशेष दुकान से ही कापी-किताब और यूनिफार्म खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। साथ ही, इन सामग्रियों की कीमतें भी मनमाने ढंग से बढ़ाकर वसूली जा रही हैं।
विद्यालय परिसर में कोई भी बिक्री गतिविधि प्रतिबंधित कर दी गई है और छात्रों पर किसी तरह की दुकान विशेष से खरीदारी का दबाव डालने को सख्त चेतावनी दी गई है।
एनसीईआरटी पुस्तकों से ही हो शिक्षण
डीआईओएस ने सभी CBSE व ICSE बोर्ड के विद्यालयों को निर्देशित किया है कि वे केवल एनसीईआरटी द्वारा अनुमोदित पुस्तकों से ही शिक्षण कार्य कराएं।








