लखनऊ। बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ आज राजधानी लखनऊ के शक्ति भवन के बाहर नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन में हजारों बिजली कर्मचारी, अभियंता, संविदा कर्मी और कई ट्रेड यूनियनों ने हिस्सा लिया। पूरे देश में यह एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल आयोजित की गई, जिसमें लगभग 27 लाख बिजली कर्मी और अभियंता शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश में एक लाख कर्मचारी हड़ताल पर
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक कर्मचारी कार्यस्थलों से बाहर निकलकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन का मकसद केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाकर बिजली कंपनियों के निजीकरण को रोकना है।
“बिजली निजीकरण से जनता की जेब पर असर” – अभियंता संघ
अभियंता संघ के महासचिव जितेन सिंह गुर्जर ने कहा कि यदि निजीकरण को लागू किया गया, तो इससे बिजली की दरें दोगुनी हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 6.50 रुपये प्रति यूनिट मिलने वाली बिजली की दर 12 से 13 रुपये प्रति यूनिट हो सकती है। साथ ही, किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा भी खत्म हो जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित निजीकरण के चलते 26,000 सरकारी पद समाप्त हो रहे हैं और 50,000 संविदा कर्मियों की नौकरी खतरे में है।
किसान यूनियनों और ट्रेड यूनियनों का मिला समर्थन
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष कमलेश यादव ने कहा, “सरकार पहले ही एयरपोर्ट और परिवहन को निजी हाथों में दे चुकी है, अब बिजली को बेचने की तैयारी कर रही है। हम किसान इसका विरोध करते हैं। सरकार देश की कमाई को बर्बाद कर रही है।”
संयुक्त संघर्ष समिति के अनुसार, हड़ताल को किसानों, उपभोक्ताओं और ट्रेड यूनियनों का व्यापक समर्थन मिला है। रेलवे, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, पोस्टल और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हैं।
बिजली आपूर्ति को बाधित न होने देने का दावा
संयुक्त समिति ने बताया कि हड़ताल के बावजूद आपात सेवाओं को बनाए रखने के लिए कंट्रोल रूम और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की गई है ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बिजली विभाग ने सख्त रुख अपनाया
यूपी पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई जानबूझकर बिजली आपूर्ति को बाधित करता है तो सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी। सभी मुख्य अभियंताओं को 100% बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. गोयल ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिजली जैसी आवश्यक सेवा से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








