- डॉ. अबीशो की मौत और बेटी का जन्म एक ही दिन
- पत्नी डॉ. निमिषा ने भावुक होकर कहा- “अबीशो होते तो सबसे खुश वही होते”
- परिवार ने कहा- बेटी में अबीशो की झलक
गोरखपुर। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए डॉ. अबीशो डेविड की मौत के महज कुछ घंटों बाद उनके घर एक नन्ही बेटी ने जन्म लिया, जिसने पूरे परिवार को भावनाओं के सैलाब में डुबो दिया।
जहां एक ओर तिरुवनंतपुरम में अबीशो के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी डॉ. निमिषा को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। सोमवार सुबह 4 बजे, परिजन उन्हें एसएटी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां उन्होंने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया।
“आज अबीशो होते तो सबसे ज़्यादा खुश वही होते”: डॉ. निमिषा
बेटी के जन्म के बाद डॉ. निमिषा बार-बार पति का नाम लेती रहीं और उन्हें देखने की जिद करती रहीं। परिवार के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे। ससुर साल्वे राज ने कहा,
“नॉर्मल डिलीवरी हुई है, मां और बच्ची दोनों ठीक हैं। लेकिन ये खुशी बहुत भारी है। बेटी के जन्म के साथ लगता है जैसे अबीशो ने रूप बदलकर फिर वापसी की हो।”
अंतिम संस्कार और जन्म एक ही दिन
डॉ. अबीशो की लाश 11 जुलाई को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल के कमरे में मिली थी। 13 जुलाई की रात उनका पार्थिव शरीर केरल पहुंचा और 15 जुलाई को ईसाई रीति से उनका अंतिम संस्कार किया गया।
संयोग ऐसा कि अंतिम संस्कार के दिन ही उनकी बेटी का जन्म हुआ। अस्पताल में बच्ची को देखने के लिए रिश्तेदारों और परिचितों की भीड़ जुट गई। हर कोई कह रहा था,
“मरकर भी अबीशो ने अपना वादा निभाया, कहा था डिलीवरी के समय घर रहूंगा।”
प्यार की कहानी, अधूरी रह गई
डॉ. अबीशो और डॉ. निमिषा की मुलाकात करीब दो साल पहले हुई थी। अबीशो उत्तर प्रदेश में पीजी की पढ़ाई कर रहे थे और निमिषा तिरुवनंतपुरम में स्त्री रोग विशेषज्ञता (PG) की प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। शादी के बाद दोनों ने मिलकर अपने आने वाले बच्चे के लिए घर में तैयारियां शुरू कर दी थीं।
लेकिन 10 जुलाई की रात अबीशो ने आखिरी बार पिता से फोन पर बात की और कहा,
“पापा, घर आ रहा हूं, कुछ लाना है क्या?”
फिर अगले दिन उसकी लाश हॉस्टल के कमरे में मिली।








