- तीन शिक्षिकाएं बर्खास्त, 3 करोड़ से अधिक की वेतन वसूली
- फर्जी बीएड डिग्री से मिली नौकरी, एसटीएफ जांच में हुआ खुलासा
- एफआईआर दर्ज करने और रिकवरी के आदेश
अंबेडकरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसता जा रहा है। ताजा प्रकरण में तीन शिक्षिकाओं को बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने यह कार्रवाई की है। साथ ही 19 वर्षों में प्राप्त वेतन की वसूली और एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी संबंधित बीईओ व वित्त लेखाधिकारी को दिए गए हैं।
दून इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की डिग्री फर्जी पाई गई
अकबरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बरौरा में तैनात सहायक अध्यापक सरोजलता और प्राथमिक विद्यालय गौरा की प्रधानाध्यापक मान्धाता द्वारा दून इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, रायपुर (छत्तीसगढ़) से प्राप्त बीएड डिग्री को आधार बनाकर नियुक्ति ली गई थी। एसटीएफ जांच में पता चला कि उक्त विश्वविद्यालय यूजीसी की मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची में शामिल नहीं है और इसके पास बीएड डिग्री देने का वैधानिक अधिकार भी नहीं है।
मान्धाता ने वर्ष 2003 में और सरोजलता ने 2005 में उक्त संस्थान से बीएड किया बताया था, लेकिन दोनों की नियुक्ति दिसंबर 2005 में कर दी गई थी। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद दोनों की सेवा समाप्त कर दी गई है। साथ ही, 19 वर्षों में मिले करोड़ों रुपये के वेतन की वसूली का भी आदेश दिया गया है।
गोंडा के फर्जी अभिलेख से नौकरी कर रहीं थीं कंचन देवी
भियांव विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक कंचन देवी द्वारा लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज, गोंडा से वर्ष 1994 में बीएड करने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया था।








