- यूलिया स्विरीडेंको बनीं यूक्रेन की नई प्रधानमंत्री
- राष्ट्रपति जेलेंस्की की सिफारिश पर संसद ने दी मंजूरी
- 262 सांसदों का समर्थन, 22 ने किया विरोध
कीव। यूक्रेन की सियासत में बड़ा बदलाव हुआ है। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सिफारिश पर संसद ने 39 वर्षीय अर्थशास्त्री यूलिया स्विरीडेंको को देश की नई प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है। वे पहले डिप्टी पीएम और अर्थव्यवस्था मंत्री थीं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डेनिस श्मिहाल की जगह ली है।
यूलिया को संसद में 262 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 22 ने विरोध में मतदान किया और 26 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। स्विरीडेंको अमेरिका के साथ खनिज समझौते में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं, जिसके बाद से उनकी कार्यशैली की सराहना की जा रही थी।
एक दिन पहले भंग हुई थी पुरानी कैबिनेट
सोमवार को राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपनी सरकार की पुरानी कैबिनेट को भंग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने नई टीम के लिए संसद को प्रस्तावित नामों की सूची सौंपी। चूंकि उनकी पार्टी ‘सर्वेंट ऑफ द पीपल’ के पास 254 सीटों का बहुमत है, इसलिए सभी नाम आसानी से मंजूर हो गए।
कैबिनेट में हुए अहम बदलाव
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डिजिटल परिवर्तन मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को उप-प्रधानमंत्री बनाया गया है।
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अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यावरण मंत्रालयों को मिलाकर एक नया मंत्रालय बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी ओलेक्सी सोबोलेव को सौंपी गई है।
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नए यूरोप और नाटो मामलों के उप-प्रधानमंत्री के तौर पर तारास काचका को नियुक्त किया गया है।
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ओल्हा स्टेफनिशिना मंत्रिमंडल से बाहर हो गई हैं और उन्हें अमेरिका में यूक्रेन का नया राजदूत बनाए जाने की संभावना है।
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पूर्व पीएम डेनिस श्मिहाल अब रक्षा मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे। हालांकि, वे कैबिनेट में बने रहेंगे। रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव पद पर बने रहेंगे।
जेलेंस्की की नई रणनीति
संसद में दिए अपने संबोधन में राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि अब अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ नए रक्षा समझौतों की ज़रूरत है। उन्होंने पुरानी रक्षा नीतियों की समीक्षा और नए सहयोग मॉडल तैयार करने की बात कही।
यूक्रेन में नियुक्ति की प्रक्रिया
यूक्रेनी संविधान के अनुसार, प्रधानमंत्री के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति करते हैं लेकिन अंतिम मंजूरी संसद से मिलती है। प्रधानमंत्री फिर अपनी कैबिनेट के मंत्रियों के नाम संसद को सौंपते हैं, जिनपर वोटिंग की जाती है। चूंकि संसद में राष्ट्रपति की पार्टी के पास बहुमत है, इसलिए नियुक्तियों में कोई अड़चन नहीं आती।
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