- 3 लाख करोड़ रुपये तक व्यापार बढ़ने की संभावना
- ब्रिटेन को आर्थिक भगोड़ों की वापसी में सहयोग का आग्रह
- स्टार्मर को पीएम मोदी का भारत दौरे का न्योता
लंदन। ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात कर लोकतंत्र और आतंकवाद पर बड़ा बयान दिया। मोदी ने साफ तौर पर कहा कि जो लोग लोकतांत्रिक आजादी का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन में खालिस्तानी गतिविधियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “हम पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने के लिए प्रधानमंत्री स्टार्मर और उनकी सरकार के आभारी हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को स्वीकार नहीं किया जा सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत से भागे आर्थिक अपराधियों को वापस लाने में ब्रिटेन को सहयोग करना चाहिए।
भारत-ब्रिटेन के बीच हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में गुरुवार को लंदन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता माना जा रहा है। तीन साल की लंबी बातचीत के बाद यह ऐतिहासिक करार संभव हो सका है।
समझौते की प्रमुख बातें:
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भारत से ब्रिटेन को होने वाले 99% निर्यात पर टैरिफ में बड़ी राहत मिलेगी।
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भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले अधिकतर उत्पादों पर आयात शुल्क घटेगा या खत्म हो जाएगा।
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भारत, व्हिस्की और कार जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर टैरिफ को 15% से घटाकर 3% करेगा।
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दोनों देशों के बीच व्यापार में हर साल करीब 3 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि होने की संभावना।
‘यूके में बसे भारतीय मूल के लोग हैं लिविंग ब्रिज’
प्रधानमंत्री मोदी ने यूके में बसे भारतीयों को भारत-ब्रिटेन रिश्तों का “लिविंग ब्रिज” बताया और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को भारत आने का आमंत्रण भी दिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्रिकेट का जिक्र करते हुए भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज की भी बात की।
70 से अधिक देशों से समझौते कर चुका है ब्रिटेन
ब्रेक्जिट के बाद यह समझौता ब्रिटेन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और व्यापारिक उपलब्धि है। इससे पहले ब्रिटेन का सबसे बड़ा समझौता ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ था। अब भारत के साथ हुए समझौते से व्यापारिक संबंधों में 34 बिलियन डॉलर तक की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।








