
- सभी मंदिरों में पुजारियों का वैरिफिकेशन जरूरी
- पहले भी कई मंदिरों में रहा है कासिम
- रासुका और ATS जांच की मांग
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मुस्लिम युवक कासिम ने खुद को हिंदू पुजारी बताकर शिव मंदिर में करीब एक साल तक सेवा की। पकड़े जाने के बाद शुक्रवार को हिंदू संगठनों ने मंदिर में गंगाजल से शुद्धिकरण किया और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
घटना सरधना थाना क्षेत्र के दादरी गांव स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर की है, जहां कासिम ने अपना नाम बदलकर ‘कृष्णा पुत्र संतरपाल’ बताया और पुजारी के रूप में मंदिर में रहने लगा। उसने ग्रामीणों को बताया कि वह भविष्यवाणी भी करता है और झाड़-फूंक से इलाज भी जानता है। मंदिर की सेवा करते हुए उसने गांववालों का भरोसा जीत लिया।
चोरी करते पकड़ा गया कासिम
बुधवार को मंदिर में भंडारे के दौरान कासिम को कुछ लोगों ने दानपात्र से दक्षिणा निकालते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जब उसका आधार कार्ड चेक किया गया, तब सच्चाई सामने आई कि उसका असली नाम कासिम है और वह बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला है। जांच में यह भी सामने आया कि कासिम के पिता अब्बास एक मस्जिद में मौलवी हैं।
मंदिरों में रहा, रेखाएं भी पढ़ता था
पूछताछ में कासिम ने बताया कि वह दिल्ली, मेरठ और मुजफ्फरनगर के कई मंदिरों में पंडित बनकर रह चुका है। उसने इस भूमिका के लिए विशेष ट्रेनिंग भी ली थी और वह हाथों की रेखा पढ़ने के साथ-साथ हिंदू मंत्रों का उच्चारण भी जानता है। जब गांव वालों को उसका व्यवहार संदिग्ध लगने लगा और दानपात्र से चोरी की घटनाएं बढ़ीं, तो संदेह गहराने लगा।
हिंदू संगठनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
कासिम की सच्चाई सामने आने के बाद हिंदू रक्षा संगठन के कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में हरिद्वार से लाया गया गंगाजल छिड़का और मंत्रोच्चार के साथ पूरे परिसर का शुद्धिकरण किया। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
संगठन के नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग करते हुए कहा कि “आस्था और विश्वास के साथ धोखा करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। यह सिर्फ धार्मिक नहीं, सुरक्षा से जुड़ा मसला है।”
उन्होंने ATS से मामले की जांच और देशभर के मंदिरों में पुजारियों के वैरिफिकेशन की मांग की।








