- यश रेजिडेंसी में लिफ्ट हादसे से 54 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत
- लिफ्ट का गेट खुला, केबिन न होने से खाली शाफ्ट में गिरकर हुई मौत
- हादसे के बाद भी लिफ्ट की मरम्मत नहीं, गेट अब भी खुला पड़ा
लखनऊ। राजधानी के अनौरा कला क्षेत्र स्थित यश रेजिडेंसी में गुरुवार को हुए दर्दनाक हादसे में 54 वर्षीय बुजुर्ग विजय यादव की जान चली गई। लिफ्ट शाफ्ट में गिरकर हुई मौत के बाद भी न तो लिफ्ट की मरम्मत हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया। घटना ने राजधानी में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है।
लिफ्ट का दरवाजा खुला, केबिन नहीं आया – सीधे गिरे नीचे
गाजीपुर निवासी विजय यादव इलाज के सिलसिले में लखनऊ आए थे और अपने भाई के मित्र के घर यश रेजिडेंसी में ठहरे थे। गुरुवार को जैसे ही उन्होंने पांचवीं मंजिल से नीचे जाने के लिए लिफ्ट का उपयोग करना चाहा, लिफ्ट का दरवाजा तो खुला लेकिन केबिन नहीं आया था। विजय को लगा लिफ्ट आ चुकी है और उन्होंने कदम बढ़ाया – और सीधे शाफ्ट में जा गिरे। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
CCTV में कैद हुआ हादसा, अब भी अनुत्तरित हैं कई सवाल
मृतक के भाई अजय यादव ने बताया कि उन्हें हादसे की सूचना परिचितों से मिली। बाद में देखा गया CCTV फुटेज इस बात की पुष्टि करता है कि गेट खुला, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि कैसे वह खुला जबकि लिफ्ट मौजूद नहीं थी। यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
पूरी इमारत ही अवैध, फिर भी कार्रवाई नहीं
चार ब्लॉक और नौ-नौ मंजिला ऊंचाई वाली यश रेजिडेंसी के पास न तो नक्शा पास है, न ही किसी प्रकार की अग्निशमन या आपात सुरक्षा सुविधा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के पास इस निर्माण से जुड़ी जानकारी पहले से थी, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। सिर्फ कागजों में नोटिंग हुई और निर्माण जारी रहा।
हादसे के बाद भी लिफ्ट खुली, बिना चेतावनी के खतरनाक हालात
स्थानीय निवासी बताते हैं कि लिफ्ट लंबे समय से खराब चल रही थी और कई बार शिकायत करने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई। अब हादसे के कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन लिफ्ट आज भी वैसी ही खुली पड़ी है, बिना किसी चेतावनी चिन्ह या अवरोधक के।
अग्निशमन और आपात सुविधाएं भी नदारद
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस इमारत में न तो आग से बचाव के कोई उपाय हैं और न ही इमरजेंसी एग्जिट मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में यहां रह रहे सैकड़ों लोगों की जान हर दिन खतरे में है।
कौन है जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतनी ऊंची, अवैध इमारत खड़ी हो सकती है? जब LDA को निर्माण की जानकारी पहले से थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?








