- हजपुरा में बाबा बरुआ दास पीजी कॉलेज में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020” पर संगोष्ठी
- NEP 2020 को राष्ट्र-केंद्रित और समग्र विकासकारी नीति बताया गया
- मुख्य वक्ताओं ने शिक्षा सुधार, कौशल विकास और मूल्यांकन प्रणाली पर जोर दिया
हजपुरा (अंबेडकरनगर)। बाबा बरुआ दास पीजी कॉलेज, परुइया आश्रम में मंगलवार को “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। महाविद्यालय और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
उद्घाटन सत्र और विषय प्रवर्तन
उप-प्राचार्य प्रो. पवन कुमार गुप्त ने उद्घाटन सत्र में विषय प्रवर्तन करते हुए कहा, “शिक्षा जीवन का मूल तत्व है, और जब तक इसकी दिशा भारतीय नहीं होगी, तब तक राष्ट्र की प्रगति अधूरी रहेगी।” उन्होंने नई शिक्षा नीति को केवल परीक्षा सुधार का प्रयास नहीं, बल्कि एक जीवंत और राष्ट्र-केंद्रित शिक्षण व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम बताया।
मुख्य वक्ताओं के विचार
मुख्य वक्ता डॉ. पवन कुमार दुबे ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से NEP 2020 की आवश्यकता, चुनौतियां और पांच वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा, “यह नीति 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के साथ आगे बढ़ रही है। इसमें हाशिए के समाज को मुख्यधारा में लाने, मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।”








