
अंबेडकरनगर (संवाददाता)। हिंदी दिवस के अवसर पर अयोध्या में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में नारायण फाउंडेशन के संरक्षक और भाजपा नेता विवेक मौर्य को हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हिंदी प्रचार-प्रसार सेवा संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
हिंदी को दिलाया जाए राष्ट्रभाषा का दर्जा : विवेक मौर्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विवेक मौर्य ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की आत्मा है। उन्होंने कहा, “हिंदी को अब सिर्फ राजभाषा नहीं, बल्कि राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए समाज को एकजुट होना होगा। यह जिम्मेदारी हम सबकी है।”
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिंदी को उसका उचित स्थान नहीं मिल पाया है। मौर्य ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम अपने बच्चों पर अंग्रेजी लाद रहे हैं और हिंदी को नजरअंदाज कर रहे हैं।
हिंदी है एकता की प्रतीक भाषा
विवेक मौर्य ने अपने संबोधन में कहा, “हिंदी हमें जाति, धर्म और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर एकता के सूत्र में बांधती है। यह भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है।” उन्होंने यह भी कहा कि आज हिंदी फिल्म, पर्यटन, व्यापार और संचार के क्षेत्र में एक सशक्त संपर्क सूत्र बन चुकी है।
घर-घर पहुंच चुकी है हिंदी : मौर्य
उन्होंने कहा, “हिंदी अब स्कूलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि घर-घर में बोली और समझी जा रही है। हिंदी का प्रसार डिजिटल और तकनीकी माध्यमों से और तेज़ी से हो रहा है।”
मौर्य ने युवाओं से अपील की कि वे हिंदी भाषा के महत्व को समझें, उसका सम्मान करें और अपने दैनिक जीवन में उसका अधिक से अधिक प्रयोग करें।








