अकबरपुर पुरानी तहसील में महिला सशक्तिकरण की असली तस्वीर सामने आई

अंबेडकरनगर। अंबेडकरनगर के अकबरपुर पुरानी तहसील में महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान की वास्तविक स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में मिशन शक्ति अभियान के दावों के बीच तहसील स्तर पर इसका पालन नदारद पाया गया है। उप जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर महिलाओं को लाइन में खड़ा करके जनसुनवाई कराए जाने का मामला सामने आया है, जो महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य के विपरीत है।

उप जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर महिलाओं को लाइन में खड़ा करना बना सवाल
जनसुनवाई के दौरान महिलाओं को कार्यालय के बाहर लंबी लाइन में खड़ा किया गया, जो न केवल असुविधाजनक था बल्कि महिला सम्मान के साथ भी खिलवाड़ है। महिलाओं को तहसील सभागार की बजाय बाहर लाइन में खड़ा करना महिला सशक्तिकरण के मूल मकसद के खिलाफ है।
सवाल यह उठता है कि क्या मिशन शक्ति अभियान केवल कागजों में ही सिमटा है या उसका प्रभाव जमीन स्तर तक पहुंच रहा है? महिलाओं को अधिकार दिलाने और उन्हें सम्मान देने के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है या वास्तविकता में उनके लिए सुविधाएं और सम्मान सुनिश्चित किए जा रहे हैं?

तहसील सभागार बना सिर्फ दिखावे का माध्यम
अकबरपुर पुरानी तहसील में मौजूद सभागार को महिला सशक्तिकरण से संबंधित कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त बताया जाता है, लेकिन व्यवहार में यह केवल एक दिखावे की वस्तु बनकर रह गया है। कार्यक्रम के दौरान कार्यालय के दरवाजे पर सुरक्षा गार्ड तैनात कर महिलाओं को लाइन में खड़ा करने पर मजबूर किया गया। इससे साफ पता चलता है कि सशक्तिकरण की बात करने वाले अधिकारी असल में महिलाओं को सम्मान देने के लिए गंभीर नहीं हैं।

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