- पराली जलाने पर जुर्माना दोगुना: 5,000 से 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर
- किसानों से अपील: पराली का मल्चिंग या डी-कंपोजर से जैविक खाद में निस्तारण
- प्रशासन, कृषि व पर्यावरण विभागों ने मिलकर संयुक्त जागरूकता और निगरानी अभियान शुरू
अम्बेडकरनगर: जिले में इस समय धान की कटाई जोरों पर है और जल्द ही गन्ना पेराई सत्र भी शुरू होने वाला है। ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए विशेष निगरानी व्यवस्था शुरू कर दी है। पराली जलाने के कारण वायु प्रदूषण बढ़ने की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस साल निगरानी को और सख्त बना दिया है।
चार स्तरों पर निगरानी, गठित की गई टीमें
जिले में पराली प्रबंधन की निगरानी अब चार स्तरों पर की जाएगी। इसके तहत प्रशासन ने जिला, तहसील, विकास खंड और ग्राम पंचायत स्तर पर टीमों का गठन किया है। जिला स्तर पर एडीएम वित्त एवं राजस्व, तहसील स्तर पर एसडीएम, विकास खंड स्तर पर बीडीओ और ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन टीमों का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखना और किसानों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना है।
पराली जलाने पर दोगुना जुर्माना, प्रशासन ने किया स्पष्ट
इस बार पराली जलाने पर प्रशासन ने जुर्माने की राशि को गत वर्ष की तुलना में दोगुना कर दिया है। उपकृषि निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि किसानों पर अब पांच हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लिया जाएगा, ताकि पराली जलाने को लेकर किसानों में कड़ी चेतावनी दी जा सके। इस कदम से प्रशासन का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाना है, जो वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बन जाती हैं।








