
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय कर्मचारियों का आंदोलन 17 अक्टूबर से लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी संघ के बैनर तले नगर निगम मुख्यालय पर धरना दे रहे कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की है।
कर्मचारियों ने प्रदर्शन के दौरान काला फीता बांधकर नारेबाजी की। महासंघ के अनुसार, उनकी मांगें पिछले 8 वर्षों से नगर विकास विभाग में लंबित हैं। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
अकेंद्रित कर्मचारियों की सेवा नियमावली लागू करना
31 दिसंबर 2001 तक दैनिक वेतन, संविदा तथा तदर्थ (धारा 108) पर कार्यरत कर्मचारियों का नियमितीकरण
पिछले प्रयास और चेतावनी
संघ ने बताया कि समय-समय पर मंत्री नगर विकास और प्रमुख सचिव स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा ने कहा कि 9 अक्टूबर को गांधी प्रतिमा पर विशाल धरना प्रदर्शन किया गया, ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित हो, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर 8 नवंबर तक कोई ठोस कदम नहीं हुआ, तो 10 नंबर से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन कार्य बंदी की जाएगी। फिलहाल, नगर निगम मुख्यालय पर प्रत्येक कार्यदिवस में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धरना जारी है।
कर्मचारियों में बढ़ता आक्रोश
प्रदेश के 17 नगर निगमों से जुड़े हजारों कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होने को तैयार हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
वेतन भुगतान
सेवा नियमावली लागू करना
पुरानी पेंशन और पीएफ बकाया भुगतान
स्थायी नौकरी
कर्मचारी आक्रोश में हैं और उन्होंने चेताया है कि आंदोलन स्थानीय निकायों की सेवाओं पर असर डाल सकता है। महासंघ ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि शासन स्तर पर तत्काल आदेश जारी किए जाएं, अन्यथा आंदोलन और तेज होगा।








