
लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े कारोबारी शादाब अहमद उर्फ डंपी को गिरफ्तार किया। शादाब पर बीएसएनएल डीजल घोटाले में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी होने का आरोप है। वह 2022 से फरार चल रहा था।
मुंबई से लखनऊ तक हुई गिरफ्तारी
सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीम ने मुंबई से लखनऊ आते ही शादाब को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। एजेंसी ने लखनऊ कोर्ट में कस्टडी रिमांड की अर्जी दी है ताकि मनी लांड्रिंग और अवैध संपत्ति से जुड़े स्रोत की जांच आगे बढ़ाई जा सके।
गिरोह का सक्रिय सदस्य
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि शादाब गिरोह आईएस-191 का सक्रिय सदस्य है। ईडी और पुलिस रिपोर्ट में बताया गया कि उसने बीएसएनएल डीजल आपूर्ति में फर्जी बिलिंग और काल्पनिक ट्रांसपोर्टेशन कर करोड़ों की हेराफेरी की। इस रकम को गिरोह की फर्मों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
पत्नी फरहीन की फर्म भी जांच में
ईडी सूत्रों के अनुसार, शादाब की पत्नी फरहीन अहमद भी गिरोह से सीधे जुड़ी हैं। उनकी कंपनी ‘आगाज कंस्ट्रक्शन’ को मुख्तार अंसारी के आर्थिक नेटवर्क का हिस्सा माना गया है। गाजीपुर पुलिस ने फरहीन की कई संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त किया है।
फरारी के दौरान लोकेशन बदलते रहे आरोपी
शादाब लगातार गिरफ्तारी से बचने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में अपने ठिकाने बदलता रहा। ईडी को मुंबई में उसकी मौजूदगी की सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसे पकड़ लिया।
मनी लांड्रिंग जांच में कई नाम सामने आने की संभावना
ईडी का दावा है कि शादाब की गिरफ्तारी से मुख्तार गिरोह के वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलेंगी और पूछताछ में कई और नाम सामने आ सकते हैं।
50 करोड़ से अधिक संपत्ति जब्त
ईडी पिछले एक वर्ष से मुख्तार अंसारी और सहयोगियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग जांच चला रही है। अब तक लखनऊ, गाजीपुर, वाराणसी और मऊ में 50 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है। गिरोह ने सरकारी विभागों, निर्माण कार्यों और परिवहन ठेकों के माध्यम से भारी अवैध कमाई की थी।








