तिरुवनंतपुरम/केरल। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार को विधानसभा में औपचारिक रूप से घोषणा की कि राज्य अत्यधिक गरीबी से मुक्त हो गया है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार का दावा है कि केरल ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य है।
सीएम ने बताया कि अत्यधिक गरीबी उन्मूलन परियोजना (EPAP) 2021 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 64,006 परिवारों की पहचान की गई और चार सालों के दौरान उन्हें गरीबी से बाहर निकाला गया। योजना के तहत प्रत्येक परिवार को रोजाना भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, घर, राशन कार्ड, आधार, पेंशन और रोजगार के अवसर प्रदान किए गए।
विपक्ष ने विशेष सत्र का बहिष्कार किया
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने पिनाराई सरकार के दावे को धोखाधड़ी करार दिया और विशेष सत्र का बहिष्कार किया। विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान नियमों के खिलाफ है। पिनाराई ने जवाब दिया कि सरकार केवल वही करती है जो लागू कर सकती है और उन्होंने जो कहा था, उसे लागू किया गया।
अत्यधिक गरीबी की परिभाषा और भारत का हाल
वर्ल्ड बैंक की जून 2025 रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों की आय प्रतिदिन ₹257 से कम है, उन्हें अत्यधिक गरीब माना जाता है। भारत में 2011-12 में 34.4 करोड़ लोग अत्यधिक गरीब थे, जो 2022-23 में घटकर 7.5 करोड़ रह गए। ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी दर 18.4% से घटकर 2.8% और शहरी क्षेत्रों में 10.7% से घटकर 1.1% हो गई।
केरल की मानवतावादी रणनीति
केरल सरकार ने अत्यधिक गरीबी उन्मूलन के लिए “मानवीय गरिमा” नामक योजना लागू की। इसमें भोजन, स्वास्थ्य, आय और आवास को आधार बनाया गया। 14 जिलों में 1,300 सर्वेयरों की टीम ने 1,03,099 लोगों का सर्वे किया, जिनमें 81% ग्रामीण इलाकों में रहते थे और 68% अकेले जीवन यापन कर रहे थे।








