इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती पर कांग्रेसजनों ने याद किया साहस

अम्बेडकरनगर – भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री और अदम्य साहस की प्रतीक इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती पर जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला कार्यालय पर गोष्ठी आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कांग्रेसजनों ने कहा कि इंदिरा गांधी का व्यक्तित्व दृढ़ संकल्प, राष्ट्रहित और निर्णायक नेतृत्व का पर्याय रहा। कार्यक्रम में उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान से लेकर प्रधानमंत्री रहते हुए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों तक पर विस्तार से चर्चा हुई।

बाल्यकाल से स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रियता

पूर्व जिला अध्यक्ष रामकुमार पाल ने बताया कि इंदिरा गांधी ने बहुत कम उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन की ओर रुझान दिखाया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को बचपन में ही अपने दादा और पिता से स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने की प्रेरणा मिली।
ग्यारह वर्ष की आयु में इंदिरा गांधी ने बच्चों का संगठन ‘बानर सेना’ बनाकर स्वतंत्रता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। यह संगठन संदेश رسانी, सभाओं की सूचना, और विरोध गतिविधियों की निगरानी जैसे कार्य करता था। पाल ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में इंदिरा गांधी का यह योगदान उनके भविष्य के नेतृत्व के संकेत थे।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में पहली जिम्मेदारी

कार्यक्रम के अध्यक्ष जिला उपाध्यक्ष गुलाम रसूल ‘छोटू’ और वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सार्वजनिक जीवन में अपनी पहली बड़ी जिम्मेदारी तब संभाली जब वे लालबहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं।
मंच से वक्ताओं ने बताया कि उनके कार्यकाल में प्रसारण और संवाद माध्यमों के विस्तार को नई दिशा मिली। देश की सांस्कृतिक विरासत और जनसूचना के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।

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