
अम्बेडकरनगर। जिले को बाल विवाह और बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से जन विकास संस्थान द्वारा शुक्रवार को जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बाल संरक्षण से जुड़े विभागों, पुलिस इकाइयों, बाल कल्याण समिति और श्रम विभाग के प्रतिनिधियों ने व्यापक चर्चा कर संयुक्त कार्ययोजना तैयार की।
यह कार्यशाला ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित की गई, जिसे हाल ही में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान से नई गति मिली है। अभियान का उद्देश्य देशभर में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त कर बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव मजबूत करना है।
जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य
जन विकास संस्थान ने घोषणा की कि वह आगामी एक वर्ष के भीतर अंबेडकरनगर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा। संस्थान ने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य तभी संभव है जब सभी विभाग, सामाजिक संगठन और समुदाय मिलकर संयुक्त प्रयास करें।
संगठन ने कहा कि अभियान की रणनीति चार प्रमुख मोर्चों पर केंद्रित होगी—
स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता
धार्मिक स्थलों पर रोकथाम प्रयास
विवाह सेवाओं से जुड़े पेशेवरों को संवेदनशील बनाना
पंचायती और शहरी वार्ड स्तर पर निगरानी व समुदाय सहयोग
बाल विवाह विरोधी कानूनों पर विस्तृत जानकारी
कार्यशाला में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राम नायक वर्मा ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कानून केवल दंडात्मक माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए मजबूत आधार हैं।
उन्होंने बाल विवाह के सामाजिक, मानसिक और कानूनी प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी ही इस अपराध को समाप्त कर सकती है।








