नई दिल्ली। क्रिसमस और नए साल के तोहफे खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग एआई चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं। ये चैटबॉट्स यूजर की जरूरत समझकर प्रोडक्ट्स की छंटनी करते हैं और उनकी तुलना में मदद करते हैं।
शॉपिंग में एआई का बढ़ता प्रभाव
- शॉपिफाई सर्वे के अनुसार, हॉलिडे सीजन में अमीर देशों में दो तिहाई कंज्यूमर और 18-24 वर्ष की आयु के 15-20% लोग शॉपिंग के लिए एआई का उपयोग करने का प्लान बना रहे हैं।
- मैकिन्जी की स्टडी में पाया गया कि अमेरिका में एआई टूल्स का दूसरा सबसे आम उपयोग शॉपिंग सलाह में किया जाता है।
- अनुमान है कि 2030 तक 270-450 लाख करोड़ रुपए की शॉपिंग चैटबॉट्स के माध्यम से होगी।
बड़ी कंपनियों की एआई रणनीति
- ओपन एआई ने शॉपिफाई और एटसी के साथ करार किया है, जिससे व्यवसायी अपने प्रोडक्ट्स चैटबॉट्स के जरिए बेच सकेंगे।
- अमेजन ने ओपन एआई एजेंट्स को अपनी साइट से डेटा लेने से ब्लॉक कर दिया है।
- वॉलमार्ट ने अक्टूबर में कहा कि उनके प्रोडक्ट्स जल्द ही चैटजीपीटी से सीधे खरीदे जा सकेंगे।
एआई चैटबॉट्स की क्षमताएं और सीमाएं
- डेड्रीम की फाउंडर जूली बोर्नस्टीन के अनुसार, चैटबॉट्स वैक्यूम क्लीनर जैसे स्पष्ट और तुलनात्मक स्पेसिफिकेशन वाले प्रोडक्ट में बेहतर हैं।
- कॉस्मेटिक्स और पर्सनल फैशन जैसी श्रेणियों में गलती करने की संभावना अधिक है।
मानवीय संपर्क का महत्व
- ऑनलाइन शॉपिंग में एआई का बढ़ता प्रभाव होने के बावजूद मानव संवाद की अहमियत बरकरार है।
- शॉपिफाई सर्वे में तीन चौथाई लोग कहते हैं कि शॉपिंग के दौरान मानव सहायकों से बातचीत उन्हें ज्यादा पसंद है, जो 2024 की तुलना में 50% अधिक है।
कुल मिलाकर, एआई चैटबॉट्स शॉपिंग को आसान और तेज बना रहे हैं, लेकिन मानव संपर्क और रियल स्टोर अनुभव अभी भी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।








