मथुरा में 3000 वकीलों के 300 चैंबर तोड़े जाने पर भारी आक्रोश
वकील कलेक्ट्रेट पहुंचे, “सिटी मजिस्ट्रेट चोर है” के नारे
जिलाधिकारी ने समझाने की कोशिश की, वकील अड़े रहे
मथुरा। शहर में 13 दिसंबर की देर रात करीब 3000 वकीलों के लगभग 300 चैंबर तोड़े जाने के बाद वकील समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही वकील आंदोलित हो गए। रविवार अवकाश होने के कारण सोमवार को बड़ी संख्या में वकील कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह कलेक्ट्रेट पहुंचे और वकीलों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वकील अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रदर्शन के दौरान वकील लगातार “सिटी मजिस्ट्रेट चोर है” के नारे लगाते रहे। वकीलों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनके चैंबरों को ध्वस्त कर दिया।
करीब चार घंटे तक चले हंगामे के बाद प्रशासन की ओर से जनरल कमेटी की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया गया, तब जाकर वकील शांत हुए।
बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव गोपाल गौतम ने आरोप लगाया कि सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रात में कार्रवाई करवाई। उन्होंने कहा कि हजारों वकीलों के चैंबर तोड़े गए और सामान भी गायब है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक चैंबर दोबारा नहीं बनवाए जाते और सिटी मजिस्ट्रेट का तबादला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन को समर्थन देने आगरा से भी वकील पहुंचे। आगरा की एडवोकेट हरजीत अरोड़ा ने कहा कि नए चैंबर के साथ-साथ हर वकील को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बार वकील सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
फिलहाल प्रशासन और वकीलों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और आगे की रणनीति जनरल कमेटी की बैठक के बाद तय की जाएगी।








