जलालपुर में बज़्म-ए-सक़लैन का तरही मुशायरा आयोजित

अम्बेडकर नगर। जलालपुर में बज़्म-ए-सक़लैन के तत्वावधान में गुरुवार को एक तरही मुशायरा आयोजित किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे। मुशायरे का मुख्य संदेश “इंसानियत ही हुसैनियत है” रखा गया, जिसे मशीर अल-हिंदी ने प्रस्तुत किया।

क़ुरआन की तिलावत और नात की प्रस्तुति से हुआ उद्घाटन

कार्यक्रम का शुभारंभ क़ारी एलिया साहब जलालपुरी द्वारा पवित्र क़ुरआन की तिलावत से किया गया। इसके बाद साकिब जलालपुरी ने नात-ए-रसूल (स.) पेश की। मुशायरे की सदारत मौलाना डॉक्टर रहबर सुल्तानी साहब क़िबला (इमाम-ए-जुमा) ने की, जबकि मौलाना डॉक्टर नय्यर ज़ुलक़रनैन साहब क़िबला विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर ज़ीशान साहब जलालपुरी ने किया।

स्थानीय और बाहरी शायरों ने पेश किया तरही कलाम

मुशायरे में जलालपुर के स्थानीय शायरों के साथ-साथ बाहरी मेहमान शायर काज़िम जारचवी ने भी अपने तरही शेर प्रस्तुत किए, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम में उर्फ़ी जलालपुरी, रहबर सुल्तानी, अंसार जलालपुरी, शरफ़ जलालपुरी, अहमद जलालपुरी, वारिस जलालपुरी, रज़ा जलालपुरी और काज़िम जारचवी ने प्रमुख कलाम पढ़े।

उर्फ़ी जलालपुरी ने कहा, “अल्लाह जाने क्या है सकीना की मंज़िलत, शब्बीर ने है माँगा बड़ी आजिज़ी के साथ।”
रहबर सुल्तानी ने शेर पढ़ा, “अब्बास दो हदफ लिए आए हैं नह्र पर, मश्क़ीज़ा भरना, लौटना फिर तशनगी के साथ।”
अंसार जलालपुरी ने कहा, “ज़ालिम को उम्र चार सदी से भी कम मिली, लेकिन हुसैन ज़िंदा हैं हर एक सदी के साथ।”
काज़िम जारचवी ने अपने कलाम में कहा, “है देखने की चीज़ कि मरहब को एक लख्त, काटा है ज़ुल्फ़िकार ने किस ख़ुशख़ती के साथ।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button