अम्बेडकरनगर। बेवाना क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति गंभीर बनी हुई है। क्षेत्र के कस्बों और गांवों में लगभग 200 से अधिक अवैध क्लीनिक संचालित होने की बात सामने आई है। इन क्लीनिकों के संचालकों के पास न तो मान्य मेडिकल डिग्री है और न ही स्वास्थ्य विभाग से कोई पंजीकरण, इसके बावजूद इलाज का पूरा कारोबार खुलेआम चल रहा है।
स्थानीय स्तर पर संचालित इन अवैध क्लीनिकों में मरीजों को इंजेक्शन, ड्रिप और शक्तिशाली दवाएं दी जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, रोजाना सैकड़ों मरीज इन क्लीनिकों में पहुंच रहे हैं। प्राथमिक उपचार के नाम पर गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है, जिससे मरीजों की स्थिति बिगड़ने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों में मरीजों की जान पर भी संकट आने की चर्चा है।
बिना योग्यता चल रहा इलाज
नियमों के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और स्वास्थ्य विभाग के पंजीकरण के क्लीनिक संचालन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद बेवाना क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर बेखौफ होकर इलाज कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में इनकी संख्या अधिक बताई जा रही है, जहां मरीज मजबूरी में इन पर निर्भर हैं।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में
सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। इतनी बड़ी संख्या में अवैध क्लीनिकों का संचालन विभाग की जानकारी के बिना संभव नहीं माना जा रहा। इसके बावजूद न तो नियमित जांच की जा रही है और न ही प्रभावी कार्रवाई देखने को मिल रही है। छिटपुट कार्रवाई के अलावा व्यापक अभियान का अभाव साफ नजर आता है।








