क्यों बढ़ रही देहदान की जागरूकता?

क्या रहा राम आसरे का निर्णय, कैसे मेडिकल शिक्षा को मिलेगा लाभ

अम्बेडकरनगर के महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में देहदान को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसी क्रम में रविवार को स्व. राम आसरे, निवासी मखदूम सराय टांडा, का पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा के उद्देश्य से एनाटॉमी विभाग को दान किया गया।

यह देहदान उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उनके परिजन संतोष वर्मा की सहमति से संपन्न हुआ। कॉलेज प्रशासन की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी की गई।

एनाटॉमी विभाग में शिक्षा और शोध के लिए उपयोग

दान किया गया पार्थिव शरीर मानव शरीर संरचना विज्ञान (एनाटॉमी) विभाग को सौंपा गया, जहां इसका उपयोग मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य में किया जाएगा। इससे भविष्य के चिकित्सकों को व्यावहारिक अध्ययन में मदद मिलेगी।

इस कार्य में विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार शर्मा, संकाय सदस्य डॉ. रणजीत, डॉ. श्रृष्टि पाल और अन्य स्टाफ ने सहयोग किया।

जागरूकता अभियान का दिख रहा असर

कॉलेज प्रशासन के अनुसार देहदान को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों और सम्मान समारोहों का असर अब दिखने लगा है। आमजन में शरीर दान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।

महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह कार्य चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान है और इससे छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा। कॉलेज प्रशासन और छात्रों ने स्व. राम आसरे के परिजनों के प्रति आभार जताया। विशेष रूप से संतोष वर्मा और सुनील कुमार वर्मा के निर्णय को सराहनीय बताया गया।

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