क्यों छोड़ी नौकरी, क्या है संकट और कैसे प्रभावित हुआ इलाज?

बांड पर आए 9 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने छोड़ी सेवा, मरीजों के इलाज पर असर; नए भर्ती की तैयारी

  • 400 बेड के अस्पताल में बढ़ी मरीजों की परेशानी
  • रोजाना 200-250 मरीज कैजुल्टी में पहुंचते हैं
  • काम का दबाव और परास्नातक चयन बनी वजह

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में बांड के तहत आए नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के नौकरी छोड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा है। कुल 11 डॉक्टरों का चयन हुआ था, लेकिन उनमें से 9 डॉक्टरों ने सेवा देने से इनकार कर दिया, जबकि 2 डॉक्टर अवकाश पर हैं।

ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं और रोजाना 200 से 250 मरीज कैजुल्टी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें से 80 से 90 मरीज भर्ती किए जाते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, कुछ डॉक्टरों का चयन परास्नातक पाठ्यक्रम में हो गया है, जबकि कुछ ने काम का अधिक दबाव होने के कारण नौकरी छोड़ दी। ये सभी डॉक्टर बांड के तहत भर्ती किए गए थे, इसलिए उनसे बांड की राशि वसूली जाएगी।

अधिकारियों ने पूरे मामले की रिपोर्ट महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को भेज दी है। अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए नए सिरे से डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है, ताकि मरीजों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके।

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