
पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही एग्जिट पोल सामने आने लगे हैं। चुनावी प्रक्रिया समाप्त होते ही अब राजनीतिक नजरें बिहार की ओर मुड़ गई हैं, जहां जल्द कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज हो गई है।
बिहार में नई सरकार के बाद पहली बड़ी परीक्षा
हाल ही में बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार बनी है, जिसमें Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। वहीं जदयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। नई सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार होगा, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
बंगाल चुनाव से जुड़ा फैसला
सूत्रों के मुताबिक, Bharatiya Janata Party का केंद्रीय नेतृत्व पश्चिम बंगाल चुनाव की आंतरिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अगर रिपोर्ट में स्थिति अनुकूल रहती है तो 6 मई को कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है, जबकि अनिश्चितता की स्थिति में 3 मई को ही यह कदम उठाया जा सकता है।
संभावित मंत्रियों की संख्या और रणनीति
बताया जा रहा है कि इस विस्तार में करीब 36 नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है। साथ ही, पिछली सरकार की तरह 1-2 मंत्री पद खाली रखे जा सकते हैं, ताकि भविष्य में राजनीतिक समीकरणों के अनुसार उनका उपयोग किया जा सके।
सहयोगी दलों की भूमिका अहम
कैबिनेट विस्तार में सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। इसमें Chirag Paswan की पार्टी, हम और अन्य सहयोगियों को भी जगह मिल सकती है। संभावित चेहरों में संतोष सुमन और उपेंद्र कुशवाहा के परिवार से जुड़े नेताओं पर भी नजर बनी हुई है।
सियासी समीकरणों पर टिकी नजर
जदयू की ओर से पुराने मॉडल के अनुसार सीट बंटवारे की बात कही जा रही है, जिससे पार्टी को अधिक मंत्रालय मिलने की संभावना जताई जा रही है।









