
अम्बेडकरनगर के अकबरपुर ब्लॉक के ताराखुर्द गांव की निवासी बदामा देवी आज भी जिंदा हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मौत दर्ज कर दी गई है। परिणामस्वरूप, उन्हें पेंशन, राशन, और संपत्ति का हक मिलना बंद हो गया है। यह मामला सरकारी लापरवाही का उदाहरण बनकर सामने आया है।
बदामा देवी ने मंगलवार को उपजिलाधिकारी के समक्ष आकर अपने दुखों का बयान किया। उन्होंने आंसू बहाते हुए कहा, “हम हैं जिंदा!” यह न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत पीड़ा है, बल्कि सरकारी सिस्टम की गहरी खामियों को उजागर करता है।
दो बार मृत घोषित होने का मामला
बदामा देवी के नाम को अकबरपुर तहसील के परिवार रजिस्टर में मृतक के रूप में दर्ज किया गया था। पहली बार लालबिहारी स्टाइल में और दूसरी बार अकबरपुर तहसील में, उनकी मौत को कागजों में शामिल कर लिया गया।
इस मुद्दे को लेकर जब बदामा देवी ने संपूर्ण समाधान दिवस पर उपजिलाधिकारी के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो पंचायत अधिकारी जयप्रकाश वर्मा ने तुरंत रिपोर्ट लगाई। उपजिलाधिकारी ने इस पर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि 7 दिनों के भीतर बदामा देवी को “जीवित” दर्ज किया जाए और पूरे मामले की जांच की जाए।
क्या यह लापरवाही या घोटाला है?
यह सवाल उठता है कि बिना जांच के एक जीवित व्यक्ति को दो बार मृत कैसे घोषित किया जा सकता है? इस मामले को लेकर लोगों में असमंजस और गहरी चिंता जताई जा रही है। यह केवल बदामा देवी का मामला नहीं, बल्कि पूरी सरकारी व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन चुका है।









