नेपाल : कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। नेपाल सरकार ने Lipulekh Pass के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताया है।
यह विवाद तब सामने आया जब भारत के विदेश मंत्रालय ने यात्रा को दोबारा शुरू करने की घोषणा की। योजना के तहत जून से अगस्त के बीच तीर्थयात्रियों के कई बैच इस मार्ग से तिब्बत जाएंगे।
नेपाल का दावा और आपत्ति
नेपाल ने 1816 की Treaty of Sugauli का हवाला देते हुए लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना हिस्सा बताया है। उसने भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
भारत का रुख और जवाब
भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि यह मार्ग दशकों से यात्रा के लिए उपयोग में है और ऐतिहासिक रूप से स्थापित है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह के दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, हालांकि बातचीत के जरिए समाधान के लिए भारत तैयार है।
रणनीतिक महत्व और आगे की स्थिति
लिपुलेख पास भारत, नेपाल और चीन के बीच एक अहम रणनीतिक बिंदु है। भारत अपनी योजना के अनुसार यात्रा की तैयारियों में जुटा है, जबकि नेपाल इसे संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मानकर विरोध कर रहा है। इस विवाद के चलते आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।









