
ईरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब डिजिटल दुनिया तक पहुंचता दिख रहा है। हाल ही में ईरान की तस्नीम एजेंसी द्वारा फारस की खाड़ी में मौजूद अंडरसी इंटरनेट केबल्स का नक्शा जारी किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञ इसे आधुनिक “डिजिटल युद्ध” के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।
देश की बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था समुद्री केबल्स पर निर्भर
रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य न केवल तेल आपूर्ति के लिए बल्कि वैश्विक इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। समुद्र के नीचे बिछी ये केबल्स यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों को सीधे वैश्विक नेटवर्क से जोड़ती हैं। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि देश की बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था इन समुद्री केबल्स पर निर्भर है। ओमान, यूएई और पाकिस्तान के लैंडिंग स्टेशनों के जरिए यह नेटवर्क भारत तक पहुंचता है। ऐसे में यदि इन केबल्स को नुकसान होता है, तो इंटरनेट सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केबल क्षतिग्रस्त होने पर इंटरनेट स्पीड में भारी गिरावट आ सकती है, साथ ही क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिजिटल पेमेंट सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर आम यूजर्स से लेकर बड़ी टेक कंपनियों तक पड़ेगा।इस बीच फ्रांस की कंपनी Alcatel Submarine Networks ने “फोर्स मेजर” नोटिस जारी किया है, जो इस बात का संकेत है कि मौजूदा हालात उनके नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसका अहम हिस्सा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह एक चेतावनी है कि वैश्विक इंटरनेट सुरक्षा को लेकर तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।









