खतौनी का सत्यापन व केंद्र प्रभारियों की मनमानी किसानों पर भारी

अंबेडकरनगर। धान खरीद में खतौनी का सत्यापन आड़े आ रहा है। समय से सत्यापन नहीं होने से धान लदी ट्रालियां घरों पर खड़ी हैं। केंद्र प्रभारियों की मनमानी भी किसानों पर भारी पड़ रही है। धान का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने 1950 रुपये प्रति क्विंटल इसका मूल्य निर्धारित किया है। खरीद में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारी स्वयं क्रय केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। धान बेचने के लिए किसानों को आनलाइन पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद खतौनी सत्यापन के लिए आनलाइन एसडीएम के पोर्टल पर भेजी जाती है। पहले, आवेदन संबंधित लेखपाल के पास पहुंचता है।

लेखपाल की रिपोर्ट के बाद एसडीएम के पोर्टल से इसके सत्यापन की प्रक्रिया निर्धारित है, लेकिन सत्यापन में खेल से एक-एक माह तक यह पूरा नहीं हो पा रहा है। पकड़ी भोजपुर गांव के किसान राम नयन ने बताया कि सात बीघे खेत में धान की रोपाई की थी। पंजीकरण कराए एक माह से अधिक हो गया, लेकिन खतौनी का सत्यापन नहीं हो सका। धान से लदी ट्रैक्टर-ट्राली घर पर खड़ी है।भाकियू के मंडल अध्यक्ष रणजीत वर्मा ने बताया कि खतौनी सत्यापन में खेल चल रहा है। जो कुछ दे रहा, उसका सत्यापन पहले हो जाता है।

क्रय केंद्र प्रभारी मनमानी कर रहे हैं। गत दिनों वर्षा के कारण फसल पानी में डूबने से धान में कुछ कालापन है। केंद्र प्रभारी इसे लेने से इन्कार कर रहे हैं। तहसीलदार मंशाराम ने बताया कि एसडीएम के पोर्टल से खतौनी सत्यापन हो रहा है। लेखपाल की रिपोर्ट मिलने के उपरांत सत्यापन आनलाइन हो रहा है। एक-दो दिनों में सभी का सत्यापन हो जाएगा।

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