क्या हो रहा है जब मरीजों को सर्जरी के लिए 2-3 महीने की वेटिंग दी जाती है?

  • महामना कैंसर संस्थान में इलाज की लंबी वेटिंग, मरीजों को हो रही परेशानी
  • मरीजों के इलाज में देरी पर पीएमओ में शिकायत, अस्पताल की लापरवाही की गई नसीहत
  • कैंसर मरीजों के लिए सरकार का कदम, अब टाटा कैंसर संस्थान का चक्कर नहीं

वाराणसी। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान में मरीजों को पंजीकरण से लेकर ओपीडी परामर्श, जांच और उपचार तक की प्रक्रिया में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और सर्जरी जैसी जरूरी सेवाओं के लिए भी मरीजों को 7 से 15 दिनों तक का इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ मामलों में सर्जरी की तारीख 2-3 महीने बाद मिल रही है।

पीएमओ तक पहुंची शिकायतें, मरीजों ने जताई नाराजगी

कई मरीजों और उनके परिजनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के ऑनलाइन पोर्टल पर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की शिकायत की है। अस्पताल के ऑनलाइन फीडबैक पेज पर भी कर्मचारियों के रवैये और देरी से इलाज को लेकर असंतोष जाहिर किया गया है।

एक मामले में, बृज इन्क्लेव निवासी 73 वर्षीया एक महिला, जिसे मुंह के कैंसर की शिकायत थी, को फरवरी में अस्पताल लाया गया था, लेकिन सर्जरी की तारीख अप्रैल के अंत में मिली। मरीज के बेटे ने पीएमओ को लिखी शिकायत में डॉक्टरों के समय पर ओपीडी में न आने और कर्मचारियों के असंवेदनशील व्यवहार की भी बात कही।

संस्थान की स्थापना का उद्देश्य हो रहा है विफल?

उत्तर प्रदेश के सुंदरपुर में स्थित इस कैंसर संस्थान और लहरतारा के होमी भाभा कैंसर संस्थान को खोलने का मुख्य उद्देश्य था कि कैंसर मरीजों को इलाज के लिए मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल जैसे संस्थानों का चक्कर न लगाना पड़े। 500 से अधिक बेड वाले इस अस्पताल में देशभर से मरीज आते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और लंबी वेटिंग के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है।

प्रशासन का दावा: “संसाधन बढ़ाने का प्रयास जारी”

संस्थान के निदेशक डॉ. एस.के. प्रधान ने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उपलब्ध संसाधनों के साथ ही बेहतर इलाज की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “रेडियोथेरेपी और अन्य प्रक्रियाओं की वेटिंग पहले से कम हुई है। नई मशीनें भी मंगाई जा रही हैं ताकि मरीजों को जल्द से जल्द इलाज मिल सके।”

Back to top button