मन की बात सुनना भी इलाज का हिस्सा, मेडिकल कॉलेज में नुक्कड़ नाटक से दिया संदेश

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर तनाव, अवसाद और आत्महत्या की रोकथाम पर जागरूकता; रंगोली से भी समझाया मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

अंबेडकरनगर। मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति की बात सुनना, उसकी भावनाओं को समझना और समय पर मदद उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी संदेश के साथ शुक्रवार को महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक भवन में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। एमबीबीएस, पैरामेडिकल और बीएससी नर्सिंग के छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक और रंगोली प्रतियोगिता के जरिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।

अनुभवों को सुनने से आएगा बदलाव

इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘लिव्ड एक्सपीरियंसेज: हर्ड वॉयसेज, रियल चेंज’ यानी ‘अनुभवों की आवाज सुनी जाए, वास्तविक बदलाव लाया जाए’ रही। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से तनाव, चिंता, अवसाद और आत्महत्या की रोकथाम का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों की बात को गंभीरता से सुनना और उन्हें बिना किसी पूर्वाग्रह के सहयोग देना महत्वपूर्ण है।

अवसाद से प्रभावित हो सकती है रोजमर्रा की जिंदगी

महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की सोच, भावनाओं और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने से व्यक्ति जीवन के तनावों का सामना करने और अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने में सक्षम होता है। उन्होंने मानसिक समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर उपचार लेने और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर जोर दिया।

मानसिक रोगों से जुड़े कलंक को दूर करने पर जोर

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने रंगोली के माध्यम से भी मानसिक स्वास्थ्य का महत्व बताया। उन्होंने संदेश दिया कि मानसिक परेशानी होने पर अपनी बात साझा करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने से हिचकना नहीं चाहिए। किसी की बात धैर्य से सुनना और उसे सहयोग देना भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करता है।

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