
- परिवार की तीसरी पीढ़ी सत्ता में: पैतोंगतार्न शिनावात्रा बनीं थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री।
- राजनीति में शिनावात्रा वंश: पिता थाकसिन और बुआ यिंगलक भी संभाल चुके हैं देश की कमान।
- तख्तापलट और सत्ता संघर्ष: सेना के हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच शिनावात्रा परिवार की सत्ता यात्रा।
बैंकॉक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर थाईलैंड पहुंचे, जहां उन्होंने थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा से मुलाकात की। इस बैठक के बाद एक बार फिर शिनावात्रा परिवार #ThailandPolitics #PaetongtarnShinawatra #ShinawatraFamily #ThailandPM #ThaksinShinawatra #YingluckShinawatra #BIMSTEC #NarendraModi #ThailandNews #PoliticalDynasty #SoutheastAsia में आ गया है। इस परिवार के तीन सदस्य देश की सत्ता संभाल चुके हैं और लंबे समय से थाईलैंड की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
शिनावात्रा परिवार का सत्ता से गहरा नाता
थाईलैंड की मौजूदा प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा से पहले उनके पिता थाकसिन शिनावात्रा और बुआ यिंगलक शिनावात्रा भी देश की बागडोर संभाल चुके हैं। यिंगलक, थाईलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। हालांकि, इस परिवार को सत्ता में कई बार सेना और न्यायिक फैसलों से चुनौती मिली है।
थाकसिन शिनावात्रा: पुलिस अफसर से बने प्रधानमंत्री
थाकसिन शिनावात्रा ने अपने करियर की शुरुआत एक पुलिस अफसर के रूप में की थी। उन्होंने 1973 से 1987 तक रॉयल थाई पुलिस में सेवा दी और फिर अमेरिका से मास्टर्स और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर में कदम रखा और उनकी कंपनी ‘शिन कॉर्पोरेशन’ देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई।
1998 में उन्होंने ‘थाई राक थाई’ पार्टी की स्थापना की और 2001 में चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने। गरीबों और ग्रामीणों के लिए चलाई गई उनकी नीतियों ने उन्हें बेहद लोकप्रिय बना दिया, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों और विवादित नीतियों के चलते 2006 में उनकी सरकार को सेना ने तख्तापलट कर गिरा दिया।
यिंगलक शिनावात्रा: पहली महिला प्रधानमंत्री
अपने भाई थाकसिन के निर्वासन के बाद, यिंगलक शिनावात्रा ने राजनीति में कदम रखा और 2011 में भारी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बनीं। हालांकि, 2014 में न्यायालय के फैसले के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी और सेना ने फिर से नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
पैतोंगतार्न शिनावात्रा: पिता के बाद बेटी के हाथों में सत्ता
15 वर्षों तक निर्वासन में रहने के बाद 2023 में थाकसिन शिनावात्रा को शाही माफी मिली और वह थाईलैंड लौटे। उनकी पार्टी फ्यू थाई ने गठबंधन सरकार बनाई, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर उनके करीबी स्रेथा थाविसिन को नियुक्त किया गया।
2024 में स्रेथा थाविसिन को पद से हटाने के बाद, पैतोंगतार्न शिनावात्रा को प्रधानमंत्री बनाया गया। 38 वर्षीय पैतोंगतार्न थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं।
शिनावात्रा परिवार की संपत्ति और विवाद
पैतोंगतार्न शिनावात्रा की संपत्ति 400 मिलियन डॉलर (करीब 3.4 हजार करोड़ रुपये) से अधिक बताई जाती है। उनके पास 217 लग्जरी हैंडबैग और 75 महंगी घड़ियां हैं, जिनकी कुल कीमत करोड़ों में है।
शिनावात्रा परिवार की सत्ता में वापसी ने एक बार फिर थाईलैंड की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, इस परिवार को पहले भी विरोध का सामना करना पड़ा है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पैतोंगतार्न की सरकार किस तरह चुनौतियों का सामना करती है।








