- एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी से आम उपभोक्ता पर असर नहीं पड़ेगा
- तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव, कीमतें स्थिर रखने का निर्देश
- तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव, कीमतें स्थिर रखने का निर्देश
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रति लीटर इन दोनों ईंधनों पर दो रुपए अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी ली जाएगी। हालांकि, इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह अतिरिक्त खर्च तेल कंपनियों द्वारा वहन किया जाएगा।
वर्तमान में पेट्रोल पर 19.90 रुपए और डीजल पर 15.80 रुपए एक्साइज वसूली होती थी। नए संशोधन के बाद यह क्रमश: 21.90 और 17.80 रुपए हो जाएगा।
सस्ता क्रूड बना राहत की वजह
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यह अतिरिक्त ड्यूटी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की घटी कीमतों के चलते बैलेंस की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि अगर आने वाले समय में क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह नीचे बनी रहीं, तो ईंधन की खुदरा दरों में गिरावट देखी जा सकती है।
कंपनियों पर आएगा अतिरिक्त बोझ
तेल क्षेत्र के विश्लेषक नरेंद्र तनेजा का कहना है कि सरकार की यह ड्यूटी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं आएगा। इसकी भरपाई तेल कंपनियों की मुनाफाखोरी में कटौती से होगी।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोज़ाना तय होती हैं, जो निम्नलिखित कारकों पर आधारित होती हैं:
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अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत
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डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति
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केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स
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ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन
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घरेलू मांग
2010 से पहले पेट्रोल की कीमतें सरकार तय करती थी, लेकिन अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ही इसे हर दिन निर्धारित करती हैं। डीजल के लिए भी यह प्रक्रिया 2014 से लागू है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 4 साल के निचले स्तर पर
इस समय वैश्विक बाज़ार में कच्चा तेल सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। ब्रेंट क्रूड में पिछले सप्ताह करीब 12% की गिरावट दर्ज की गई और सोमवार को यह 64 डॉलर से भी नीचे फिसल गया। ऐसे में एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दामों में राहत मिल सकती है।








