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प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहचान उजागर करने के आरोप पर कोर्ट सख्त, 8 लोगों की याचिका खारिज
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कोर्ट ने माना— रेप पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर मामला, अब ट्रायल की होगी प्रक्रिया
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पूजा बेदी समेत अन्य पर केस जारी रहेगा, कोर्ट ने ‘इरादा नहीं था’ दलील खारिज की
मुंबई। एक्ट्रेस और सोशल एक्टिविस्ट पूजा बेदी समेत आठ लोगों की याचिका को मुंबई सेशंस कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इन सभी पर एक महिला की पहचान सार्वजनिक करने का आरोप है, जिसे लेकर अब ट्रायल चलेगा। मामला एक पुराने यौन उत्पीड़न केस से जुड़ा है, जिसमें सिंगर-एक्टर करण ओबेरॉय को आरोपी बनाया गया था।
कोर्ट का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर यह प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता की पहचान उजागर की गई है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 228A का उल्लंघन है। इस धारा के तहत किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना गैरकानूनी माना जाता है।
वकील का पक्ष:
करण ओबेरॉय के वकील दिनेश तिवारी ने बताया कि वे सिर्फ करण का पक्ष रख रहे हैं। उनके अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गलती से एक शख्स ने महिला का नाम ले लिया था, लेकिन उसी समय पूजा बेदी ने हस्तक्षेप कर उसे रोक दिया और मीडिया से अनुरोध किया कि उस हिस्से को न दिखाएं। वकील ने दावा किया कि यह सब अचानक हुआ और किसी ने जानबूझकर नहीं किया।
शिकायतकर्ता की शिकायत:
महिला का कहना है कि करण ओबेरॉय के खिलाफ केस दर्ज होने के कुछ ही दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें उनकी पहचान उजागर की गई। इसके चलते उन्हें मानसिक तनाव और बदनामी का सामना करना पड़ा।
पुलिस जांच:
पुलिस के मुताबिक, मई 2019 में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शेयर हुआ, जो आज भी ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ फरवरी 2021 में कार्रवाई के आदेश दिए।
कोर्ट की टिप्पणी:
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही किसी ने जानबूझकर पहचान उजागर नहीं की हो, लेकिन यदि वे समूह में शामिल थे और पहचान उजागर हुई, तो सभी जिम्मेदार माने जा सकते हैं। यह सब अब ट्रायल में तय किया जाएगा।
जिन पर केस चला है:
पूजा बेदी, अन्वेषी जैन, चैतन्य भोसले, शेरीन वर्गीज, सुधांशु पांडे और वकील दिनेश तिवारी समेत अन्य लोगों पर कार्यवाही की जा रही है।








