एक चिंगारी, सैकड़ों ज़िंदगियाँ – अंबेडकरनगर अस्पताल में मौत को दावत

  • बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहा जिला अस्पताल, किसी भी समय घट सकती है बड़ी दुर्घटना
  • अस्पताल में आग से निपटने की व्यवस्था नहीं, मरीज और तीमारदार भगवान भरोसे
  • प्रशासनिक दावों की पोल खोलती जमीनी हकीकत, सुरक्षा इंतजामों में भारी चूक

अंबेडकरनगर। लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल में हाल ही में हुए भयावह अग्निकांड ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को एक बार फिर शर्मसार किया है। उस त्रासदी ने आग से सुरक्षा की वास्तविकता को उजागर किया है, जहां जीवन बचाने के बजाय सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम नदारद हैं। लेकिन अंबेडकरनगर के जिला अस्पताल में स्थितियां शायद इस आग से सीखने के बजाय और भी खराब हो गई हैं।

अस्पताल में अग्नि सुरक्षा का अभाव

यहां के जिला अस्पताल में, जो हर दिन सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों का इलाज करता है, अग्नि सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। न तो कार्यशील फायर अलार्म हैं, न ही अग्निशमन यंत्र हर वार्ड के बाहर रखे गए हैं, और यहां तक कि अस्पताल ने अब तक फायर एनओसी भी प्राप्त नहीं किया है। इस अस्पताल के हालात देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां कोई भी अनहोनी घटना हो सकती है, और तब स्थिति अत्यधिक खतरनाक हो सकती है।

पहले भी हो चुका है आग का हादसा

अंबेडकरनगर का जिला अस्पताल, जो 100 शैय्या वाला एक बड़ा चिकित्सा केंद्र है, पहले भी एक बड़ी दुर्घटना से बच चुका है। पिछले दो वर्षों में प्रसव कक्ष के ऊपरी तल पर शॉर्ट सर्किट से आग लग चुकी है, लेकिन सौभाग्यवश बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने प्रशासन को आग से सुरक्षा के मुद्दे पर चेतावनी दी थी, लेकिन उसकी अनदेखी की गई।

अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों की स्थिति गंभीर

महिला वार्ड, एसएनसीयू, ओपीडी, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड कक्ष जैसे अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में न तो अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं, न ही कर्मचारियों को आग बुझाने के लिए कोई प्रशिक्षण दिया गया है। इन वार्डों में रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं, और अगर कोई दुर्घटना घटती है, तो केवल एक मार्ग से बचाव किया जा सकता है, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

मरम्मत का दावा, जमीनी हकीकत की परतें

अस्पताल प्रशासन का दावा है कि दो महीने पहले यूपी सिडको के माध्यम से अग्नि सुरक्षा से संबंधित मरम्मत कार्य कराया गया था, लेकिन अस्पताल की जमीनी हकीकत यह है कि फायर अलार्म सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं, पानी की पाइपें और नाजिल गायब हैं, और अग्निशमन सिलेंडर कहीं भी मौजूद नहीं हैं। अगर किसी वार्ड में आग लगती है, तो कर्मचारियों को पहले सिलेंडर की खोज करनी पड़ेगी, जो खुद में एक खतरनाक स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

प्रशासन की खामियां और जवाबदेही

अस्पताल के प्रभारी सीएमएस, डॉ. पीएन यादव ने स्वीकार किया कि अस्पताल में लगाए गए अग्निशमन यंत्र खराब हो गए थे, जिन्हें हाल में मरम्मत कराई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मरम्मत में कोई लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए बजट प्रस्तावित किया गया है।

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