
- दिल्ली बैठक में नेताओं ने तन, मन और धन से पार्टी मज़बूत करने का संकल्प लिया
- मायावती ने केंद्र की शिक्षा और भाषा नीति पर जताई नाराज़गी
- जनगणना आधारित सीट पुनर्विन्यास जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) अब अपने राजनीतिक दायरे को उत्तर भारत से आगे बढ़ाते हुए देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पार्टी नेतृत्व ने महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में संगठन विस्तार और जनजागरूकता बढ़ाने की ठोस योजना तैयार की। बैठक के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पूरी निष्ठा से संगठन को मज़बूती देने का संकल्प लिया। यह तय किया गया कि इन नए क्षेत्रों में बहुजन चेतना को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा और वहां के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी।
पार्टी प्रमुख मायावती ने इस बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जनगणना आधारित संसदीय सीटों का पुनर्विन्यास, नई शिक्षा नीति और भाषा थोपने जैसे विषय आम जनता के हितों पर चोट कर रहे हैं। उन्होंने इन मुद्दों पर केंद्र को आड़े हाथों लिया और कहा कि कुछ राजनीतिक दल इन्हें अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जो देश के समग्र विकास के लिए नुकसानदायक है।
मायावती ने खासकर भाषा के मुद्दे को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और वंचित वर्गों के बच्चों को यदि अंग्रेज़ी भाषा से वंचित किया गया, तो वे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में पिछड़ सकते हैं। उन्होंने केंद्र से अपील की कि भाषा का चुनाव लोकतांत्रिक होना चाहिए, और इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए।








