गवर्नर मल्होत्रा ने क्या बताया-क्यों भारतीय वित्तीय बाजार अब भी सशक्त हैं

  • आरबीआई गवर्नर ने वित्तीय अस्थिरता के बावजूद भारतीय बाजार की स्थिरता पर प्रकाश डाला

  • भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर गवर्नर मल्होत्रा का आत्मविश्वास: मुद्रास्फीति पर नियंत्रण की उम्मीद

  • गवर्नर मल्होत्रा ने वैश्विक व्यापार युद्ध और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय वित्तीय प्रणाली की क्षमता को सराहा

नई दिल्ली ।  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इंडोनेशिया के बाली में 24वें FMMDA-PDAI वार्षिक सम्मेलन में कहा कि वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए पिछला साल चुनौतीपूर्ण रहा, और वर्तमान में व्यापार युद्ध के कारण अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत ने उच्च मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई के अंतिम चरण में प्रवेश किया है और अनिश्चितता के बीच नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

मुद्रास्फीति और विकास पर सकारात्मक दृष्टिकोण

मल्होत्रा ने कहा कि भारत का घरेलू विकास-मुद्रास्फीति संतुलन बेहतर हुआ है, जिससे वित्त वर्ष 2026 में मुद्रास्फीति 4% के लक्ष्य के करीब रहने का अनुमान है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताएं और मौसमी जोखिम अभी भी बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की GDP वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026 में 6.5% रहने का अनुमान है, जो इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाता है।

नीतिगत उपायों और बाजार स्थिरता पर जोर

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने हाल ही में दो बार रेपो दरों में कटौती की है और बाजार में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा, “हम वैश्विक स्तर पर हो रहे व्यापार युद्ध और अन्य चुनौतियों पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर नीतिगत कदम उठाएंगे।”

भारतीय वित्तीय बाजारों की मजबूती

मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय वित्तीय बाजार—विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स), सरकारी प्रतिभूतियां (G-Sec), और मनी मार्केट—पिछले कुछ महीनों में स्थिर रहे हैं। हालांकि कुछ समय पहले रुपया डॉलर के मुकाबले दबाव में था, लेकिन अब इसने बेहतर प्रदर्शन किया है। इक्विटी बाजारों में भी सुधार हुआ है, हालांकि पूंजी बहिर्वाह की स्थिति देखी गई, जो अन्य उभरते बाजारों में भी दिखाई दी। सरकारी प्रतिभूति बाजार भी स्थिर रहा, और केंद्र व राज्य सरकारों की कुल 24.7 लाख करोड़ रुपये की उधारी आसानी से पूरी हो गई। केंद्र सरकार की उधारी लागत वित्त वर्ष 2024 के 7.24% से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 6.96% हो गई है।

भविष्य की राह: चुनौतियां और अवसर

मल्होत्रा ने कहा कि भारत परिवर्तन और संभावनाओं के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पास एक बड़ी युवा आबादी, कुशल जनशक्ति और तकनीकी विकास का लाभ है, जिसका उपयोग करके हम नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।” इस सम्मेलन में वैश्विक वित्तीय बाजारों की चुनौतियों और भारत की स्थिरता पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें आरबीआई की नीतियों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

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