छात्रों के तिलक और कलावा पहनने पर सख्ती-स्कूल में बढ़ता तनाव

  • तिलक और कलावा पर आपत्ति के बाद छात्रों को जानबूझकर फेल करने का आरोप, परिजनों ने जताया विरोध
  • स्कूल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर सख्ती, बच्चों की परफॉर्मेंस को बनाया गया बहाना?
  • प्रिंसिपल की चेतावनी से भड़के पेरेंट्स, कहा—बच्चों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

लखनऊ।   राजधानी के इंदिरा नगर स्थित सेंट डोमिनिक सैवियो कॉलेज एक नए विवाद में घिर गया है। स्कूल पर आरोप है कि उसने धार्मिक प्रतीकों—जैसे तिलक और कलावा—के चलते छात्रों को जानबूझकर फेल कर दिया। इसको लेकर अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर नाराज़गी जताई। मामले के तूल पकड़ते ही स्कूल प्रशासन बैकफुट पर आया और फेल किए गए छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आश्वासन दिया। इंदिरा नगर के सेक्टर-सी की निवासी प्रीति राय का दावा है कि उनके बेटे कार्तिकेय, जो 11वीं कक्षा का छात्र है, को धार्मिक प्रतीकों के कारण निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया, “बेटा नर्सरी से यहीं पढ़ रहा है और कभी फेल नहीं हुआ। लेकिन इस बार स्कूल प्रशासन ने तिलक और कलावा पर आपत्ति जताई और बच्चों को फेल करना शुरू कर दिया।”

क्या हुआ था?

11वीं के छात्र कार्तिकेय सिंह समेत कई छात्रों ने बताया कि तिलक या कलावा पहनने पर प्रिंसिपल ने उन्हें धमकाया और फेल कर दिया।

पेरेंट्स का आरोप है कि इस सत्र में करीब 60 छात्रों को जानबूझकर फेल किया गया, जिनमें चौथी कक्षा के बच्चे भी शामिल हैं।

प्रदर्शन के बाद स्कूल प्रशासन ने झुकते हुए री-एग्जाम का ऐलान किया।

प्रिंसिपल का पक्ष

प्रिंसिपल डेरिक जैक्सन ने आरोपों को “अफवाह” बताते हुए कहा कि छात्रों को केवल खराब परफॉर्मेंस के कारण फेल किया गया था। उन्होंने दावा किया कि फेल होने वाले छात्र अलग-अलग धर्मों से थे।

धार्मिक पहनावे को लेकर विवाद

छात्रों ने बताया कि नए प्रिंसिपल के आने के बाद से ही तिलक-कलावा पर रोक लगा दी गई, जबकि ईसाई शिक्षक अपने धार्मिक ड्रेस (जैसे सिस्टर का हेडस्कार्फ़ या फादर का क्रॉस) पहन सकते हैं।

कार्तिकेय की बहन भव्या (पूर्व छात्रा) ने कहा कि पहले स्कूल में ऐसा कोई नियम नहीं था।

स्कूल की स्थिति

स्कूल में लगभग 2000 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें 80% गैर-ईसाई समुदाय से हैं।

पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल मोटी फीस (सालाना 80 हजार रुपये) लेने के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रहा।

अब क्या?
स्कूल ने री-एग्जाम का वादा किया है, लेकिन पेरेंट्स धार्मिक भेदभाव और अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है।

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