- शहीद शुभम की पत्नी की आंखों में था सिर्फ एक सवाल – ‘मुझे क्यों नहीं मारी गोली?
- आतंकी हमले की भयावहता बयान करती पत्नी की दास्तान – ‘हिंदू हो या मुसलमान?’ से लेकर हत्या तक
- कानपुर में गूंजे पाक विरोधी नारे, शहीद शुभम की अंतिम यात्रा में लोगों का गुस्सा उबाल पर
कानपुर। पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए कानपुर निवासी शुभम द्विवेदी (31) का अंतिम संस्कार गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव हाथीपुर में किया गया। अंतिम संस्कार की इस प्रक्रिया में हर आंख नम थी और हर दिल रो रहा था। शुभम के चाचा नरेंद्र ने उन्हें मुखाग्नि दी, वहीं पिता संजय द्विवेदी बगल में खड़े होकर बिलखते रहे। सुबह 11 बजे जैसे ही शुभम की शव यात्रा घर से ड्योढ़ी घाट के लिए निकली, पत्नी एशान्या की चीख गूंज उठी। वह दो दिनों से अपने पति की शर्ट पहने हुए थीं। शव यात्रा के वक्त उन्होंने शर्ट उतारी, उसे सीने से लगाया और फूट-फूटकर रोने लगीं। यह दृश्य देख वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें भर आईं।
“योगी जी, हमें बदला चाहिए” – पत्नी एशान्या की गुहार
शहीद के घर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभम को श्रद्धांजलि दी और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान पत्नी एशान्या ने रोते हुए कहा, “आतंकियों ने मेरे सामने ही मेरे पति को गोली मारी, योगी जी, हमें कड़ा बदला चाहिए।” सीएम योगी ने आश्वस्त करते हुए कहा, “यह हमला आतंकवाद के ताबूत पर आखिरी कील साबित होगा। दोषियों को सजा जरूर मिलेगी, साजिश में शामिल कोई नहीं बख्शा जाएगा।” जब सुबह पार्थिव शरीर को घर लाया गया, तो एशान्या पति की तस्वीर को एकटक देखती रहीं। बार-बार वह फोटो को सहलातीं और कहतीं, “मुझे क्यों नहीं मारी गोली… अब मैं किसके लिए जिंदा रहूं?” उनकी यह पीड़ा हर दिल को चीर गई।








